
हाइलाइट्स
वट पूर्णिमा व्रत उत्तर भारत के वट सावित्री व्रत के समान ही होता है.
वट पूर्णिमा व्रत हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को रखते हैं.
वट पूर्णिमा पर 3 शुभ योग शिव, सिद्ध और रवि योग बन रहे हैं.
वट पूर्णिमा व्रत 3 जून शनिवार को है. इस दिन भद्रा सुबह 11 बजकर 16 मिनट से रात तक है. वट पूर्णिमा व्रत उत्तर भारत के वट सावित्री व्रत के समान ही होता है, लेकिन यह मुख्यत: गुजरात, महाराष्ट्र समेत दक्षिण भारत के राज्यों में रखा जाता है. इस व्रत में भी वट वृक्ष, देवी सावित्री और सत्यवान की पूजा करने का विधान है. इस व्रत को केवल सुहागन महिलाएं ही करती हैं. वट पूर्णिमा व्रत करने से पति की आयु लंबी होती है और
दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है. केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बता रहे हैं वट पूर्णिमा व्रत के पूजा मुहूर्त के बारे में.
वट पूर्णिमा व्रत 2023 तिथि मुहूर्त
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, वट पूर्णिमा व्रत हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को रखते हैं. इस दिन ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत भी होता है. इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा की तिथि 3 जून को सुबह 11:16 बजे से लेकर 4 जून रविवार को सुबह 09:11 बजे तक मान्य है.
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वट पूर्णिमा व्रत 2023 पूजा के शुभ मुहूर्त
3 जून को वट पूर्णिमा व्रत की पूजा के लिए सुबह और दोपहर में मुहूर्त हैं. जो महिलाएं सुबह में वट पूर्णिमा व्रत की पूजा करना चाहती हैं, वे सुबह 07:07 बजे से सुबह 08:51 बजे तक कर सकती हैं. यह शुभ-उत्तम मुहूर्त है.
इसके बाद दोपहर में पूजा का मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से शाम 05 बजकर 31 मिनट तक है. इसमें चर-सामान्य मुहूर्त दोपहर 12:19 से 02:03 बजे तक है. लाभ-उन्नति मुहूर्त दोपहर 02:03 बजे से दोपहर 03:47 बजे तक है. अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त दोपहर 03:47 बजे से शाम 05:31 बजे तक है.
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वट पूर्णिमा पर बने हैं शिव, सिद्ध और रवि योग
वट पूर्णिमा व्रत वाले दिन 3 शुभ योग शिव, सिद्ध और रवि योग बन रहे हैं. रवि योग सुबह 05:23 बजे से सुबह 06:16 बजे तक, शिव योग सुबह से लेकर दोपहर 02:48 बजे तक और सिद्ध योग दोपहर 02:48 बजे से देर रात तक है. शिव योग साधना के लिए अच्छा होता है.
वट पूर्णिमा व्रत पर नहीं होगा भद्रा का दुष्प्रभाव
वट पूर्णिमा व्रत पर भद्रा सुबह 11:16 बजे से रात 10:17 बजे तक है. हालांकि यह भद्रा स्वर्ग की है, इसलिए इसका दुष्प्रभाव पृथ्वी पर नहीं होगा. हालांकि भद्रा काल में व्रत और पूजा पाठ वर्जित नहीं होता है. कुछ शुभ कार्य ही वर्जित होते हैं.
वट पूर्णिमा व्रत और पूजा
वट पूर्णिमा व्रत वाले दिन सुबह स्नान और ध्यान के बाद देवी सावित्री, सत्यवान, वट वृक्ष यानि बरगद के पेड़ की पूजा करते हैं. पूजा के समय वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए उसमें 7 बार कच्चा सूत लपेटते हैं और वट पूर्णिमा व्रत कथा सुनते हैं. इससे पति की आयु बढ़ती है. देवी सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी.
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Tags: Dharma Aastha, Vat Savitri Vrat
FIRST PUBLISHED : June 02, 2023, 08:10 IST









