Interesting Facts: इंसानों समेत धरती पर पाए जाने वाले ज्यादातर जीवों के खून का रंग लाल होता है. ज्यादातर लोग जानते होंगे कि रक्त में तीन प्रकार की कोशिकाएं व्हाइट ब्लड सेल्स, प्लेटलेट्स और रेड ब्लड सेल्स पाई जाती हैं. श्वेत रक्त कोशिकाएं यानी कि ल्यूकोसाइट्स वायरस, बैक्टीरिया और दूसरे रोगजनकों से लड़ने में मदद करती हैं. प्लेटलेट्स रक्त को थक्का बनाने और क्षति को निंत्रित करती हैं और लाल रक्त कोशिकाएं शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह करती हैं. यही रेड ब्लड सेल्स कार्बन डाइऑक्साइड को फेफड़ों तक ले जाकर शरीर से बाहर निकालने में मदद करती हैं.
इंसानों से लेकर भेड़िये तक और बाघ से लेकर शार्क तक ज्यादातर जीवों की नसों में लाल रंग का खून ही होता है. यह रंग हीमोग्लोबिन के कारण होता है् यही प्रोटीन हमारे रक्त को ऑक्सीजन शरीर के अलग-अलग हिस्सों में पहुंवाने में मदद करता है. हीमोग्लोबिन आंशिक रूप से आयरन एटम्स से बना होता है, जो इस प्रोटीन को एक क्रिमसन रूप देते हैं. चूंकि प्लेटलेट्स और श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या लाल रंग से ज्यादा होती है, इसलिए मानव रक्त लाल दिखता है. वहीं, प्राकृतिक कारणों की वजह से नीले रक्त वाले अकशेरूकीय, हरे रक्त वाले सरीसृप और मछलियों की नसों में पारदर्शी तरल पदार्थ होता है.
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न्यू गुएना में लाइम ग्रीन ब्लड वाले स्किंक फैमली की छिपकली की कई प्रजातियां पाई जाती हैं.
न्यू गुएना के हरे रक्त वाले स्किंक्स
न्यू गुएना में लाइम ग्रीन ब्लड वाले स्किंक फैमली की छिपकली की कई प्रजातियां पाई जाती हैं. उनकी जीभ, मांसपेशियां और हड्डियां हरे रंग के अलग-अलग शेड्स की होती हैं. मनुष्यों की तरह सरीसृपों में हीमोग्लोबिन युक्त लाल रक्त कोशिकाएं होती हैं. ऐसी कोशिकाएं हमेशा के लिए नहीं रहती हैं. जब वे टूट जाती हैं तो ग्रीन पिगमेंटेड अपशिष्ट उत्पाद बिलीवरडीन बनते हैं. अधिकांश कशेरुकी इस पदार्थ को अपने सर्कुलेटरी सिस्टम से फिल्टर कर शरीर से बाहर निकाल देते हैं. दरअसल, ये अतिरिक्त बिलीवरडीन कोशिकाओं, न्यूरॉन्स और डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है. फिर भी छिपकलियों की रगों में बिलीवरडीन का स्तर होता है, जो एक इंसान को मार सकता है. साइंस एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित पेपर के मुताबिक, ये पिगमेंट इतना गाढ़ा होता है कि हीमोग्लोबिन को दबा देता है और उनका रक्त हरा दिखता है. हालांकि, वैज्ञानिक अभी तक हरे रक्त के फायदे पता नहीं कर पाए हैं. छिपकलियों को खाने वाले परभक्षी बाद में बीमार नहीं होते हैं.
क्रोकोडाइल आइसफिश अंटार्कटिका के आसपास समुद्र के पानी में रहती हैं.
क्रोकोडाइल आइसफिश का रंगहीन रक्त
क्रोकोडाइल आइसफिश की 16 प्रजातियों को मान्यता दी गई है. ये अंटार्कटिका के आसपास समुद्र के पानी में रहती हैं. इनमें पाया जाने वाला एक्स्ट्रीमोफिल्स उन परिस्थितियों में पनपने के लिए होता, जिनमें ज्यादातर कशेरुकियों की मौत हो जाती है. क्रोकोडाइल आइसफिश समुद्र के उन ठंडे हिस्से में पाई जाती हैं, जहां पानी का तापमान 1.9 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है. असाधारण रूप से ठंडे पानी में लाल रक्त कोशिकाएं दायित्व में तब्दील हो जाती हैं. ज्यादा इंडी जगहों पर इन कोशिकाओं की वजह से ही रक्त खतरनाक रूप से गाढ़ा हो जाता है. इसीलिए रीढ़ की हड्डी वाले अन्य ज्ञात जानवरों के उलट क्रोकोडाइल आइसफिश में लाल रक्त कोशिकाएं नहीं होती हैं. क्रोकोडाइल आइसफिश ठंडे पानी में मौजूद ऑक्सीजन को अवशोषित करती हैं. मछलियों पर अध्ययन करने वाले जीवविज्ञानी डिटलेफ रुस्तद के मुताबिक, उनका रक्त रंगहीन होता है.
ऑक्टोपस के रक्त में हेमोसायनिन में कॉपर एटम्स पाए जाते हैं.
ऑक्टोपस का रक्त क्यों होता है नीला
लगभग सभी कशेरुकी जंतुओं के सर्कुलेटरी सिस्टम में हीमोग्लोबिन प्रमुख घटक है. फिर भी कई रीढ़विहीन जीव एक वैकल्पिक प्रोटीन हेमोसायनिन का इतेमाल करते हैं. दोनों ऑक्सीजन को बांधने और परिवहन में सक्षम हैं. हालांकि, हीमोग्लोबिन में आयरन एटम्स होते हैं तो हेमोसायनिन में कॉपर एटम्स पाए जाते हैं. ऐसे में हेमोसायनिन वाला रक्त मानव रक्त से अलग दिखता है. जब हेमोसायनिन युक्त रक्त ऑक्सीजन युक्त हो जाता है, तो कॉपर एटम्स इसे नीला कर देते हैं. रक्त में हेमोसायनिन पाए जाने वाले अकशेरूकीय जीवों की सूची लंबी है. क्रस्टेशियंस अपने रक्तप्रवाह में प्रोटीन का उपयोग करते हैं, जैसा मकड़ियों और बिच्छुओं में होता है. यही नहीं, ऑक्टोपस के पास तीन दिल होते हैं, जिससे वे इस तरल को पंप कर सकते हैं. ऑक्टोपस कुछ गहरे, ठंडे और पूरी तरह से बिना ऑक्सीजन वाले पानी में जीवित रहने के लिए तांबे से भरे प्रोटीन का उपयोग करते हैं.
हॉर्सशू क्रैब का रक्त चिकित्सा विकृतियों के खिलाफ अंतहीन लड़ाई में हमारे सहयोगी हैं.
हॉर्सशू क्रैब्स में नहीं होतीं डब्ल्यूबीसी
हॉर्सशू क्रैब्स का मानव जाति पर बहुत बड़ा कर्ज है. ये समुद्री अकशेरूकीय चिकित्सा विकृतियों के खिलाफ अंतहीन लड़ाई में हमारे सहयोगी हैं. यह सब उनके अद्भुत रक्त के कारण ही है. बता दें कि हॉर्सशू क्रैब्स असल में केकड़े नहीं होते हैं. वे मकड़ियों के ज्यादा निकट हैं. हॉर्सशू क्रैब्स में हेमोसायनिन से भरा नीला रक्त होता है. इसके अलावा उनमें सफेद रक्त कोशिकाएं नहीं होती हैं, जो उन्हें समुद्र में घूमने वाले कई प्रकार के हानिकारक जीवाणुओं और विषाणुओं से बचाती हैं. विकास के क्र में कठोर खोल वाले जीवों को रोग फैलाने वाले सूक्ष्मजीवों से लड़ने का अलग तरीका दिया है. हॉर्सशू क्रैब्स के रक्त में चलती हुई कोशिकाएं अमीबोसाइट्स होती हैं. जब इनमें से किसी एक को जीवाणु मिलता है तो ये तेजी से जमने वाले जेल का स्राव करती हैं, जो घुसपैठिए को घेर लेता है.
यह पदार्थ अवांछित बैक्टीरिया को फैलने से रोकता है. चिकित्सा समुदाय के लिए यह एक वरदान साबित हुआ है. वैज्ञानिक हॉर्सशू क्रैब्स के रक्त से सभी आईवी दवाओं का परीक्षण करते हें. इसमें इसके नीला रक्त के साथ दवा का नमूना मिलाया जाता है. अगर 45 मिनट में कोई थक्का दिखाई देता है तो शोधकर्ताओं को पता चल जाता है कि दवा में बैक्टीरिया हैं यानी दवा मानव रोगियों पर इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं है.
ब्रैकियोपॉड्स के रक्त में पाए जाने वाले हेमरिथ्रिन में भी आयरन एटम्स पाए जाते हैं.
ब्रैकियोपॉड्स के रक्त में होता है हेमरिथ्रिन
ब्रैकियोपॉड्स समुद्र में रहने वाले जानवर हैं, जो क्लैम की तरह दिखते हैं. ये रक्त में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए हीमोग्लोबिन या हेमोसायनिन पर निर्भर नहीं होते हैं. उनके रक्त में हेमरिथ्रिन पाया जाता है. हीमोग्लोबिन की तरह इसमें आयरन एटम्स होते हैं. हेमरिथ्रिन डीऑक्सीजनेटेड रक्त को या तो रंगहीन या हल्का पीला बनाता है. हालांकि, एक बार जब रक्त ऑक्सीजन लेना शुरू कर देता है तो यह बैंगनी से गुलाबी रंग को अपना लेता है. सिपुंकुला समुद्री कीड़ों में भी इस तरह का खून होता है.
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FIRST PUBLISHED : June 01, 2023, 15:38 IST








