
मोहित शर्मा/ करौली. कहते हैं कि किस्मत भगवान लिखता है. लेकिन उसे मिटा कर खुद गढ़ने का मजा कुछ और ही होता है. कुछ ऐसी ही किस्मत अपनी मेहनत के दम पर गढ़ी है नारौली डांग के बेटे हिमांशु मंगल ने. जिन्होंने अभी हाल ही में आए सिविल सर्विसेज 2022 के रिजल्ट में 288 वीं रैंक हासिल कर अपनी और अपने परिवार की किस्मत बदल दी है. हिमांशु ने तीन बार मिलने वाली असफलता के बाद चौथे प्रयास में अपनी सफलता पाई है. पिछड़े क्षेत्र से महज 27 वर्ष की उम्र में आईएएस बनने वाले हिमांशु के संघर्ष की सबसे अहम बात यह है कि उन्होंने यूपीएससी की तैयारी के लिए 3 साल प्राइवेट जॉब करके पैसे जुटाए थे.
2017 में दिया था पहला एग्जाम, पढ़िए हिमांशु की जुबानी
सिविल सर्विसेज 2022 के परिणाम में 288 वी रैंक प्राप्त करने वाले हिमांशु मंगल ने बताया कि मैंने यूपीएससी का पहला एग्जाम 2017 में दिया था. उस वक्त मैं मुंबई से आईआईटी के फाइनल ईयर में था. जिसमें में दो या तीन नंबर से रह गया. लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर रहने के चलते मैंने उस वक्त यूपीएससी की तैयारी छोड़कर एक प्राइवेट जॉब ज्वाइन कर ली थी. 2017 से 2020 में प्राइवेट जॉब के दौरान ही मुझे लगा कि अपना भी एक यूपीएससी में जाने का सपना हुआ करता. जो कहीं ना कहीं छूट गया है. फिर मेरा मन यूपीएससी की तैयारी के लिए एक बार दोबारा बन गया. जिसके बाद मैंने जॉब छोड़कर घर पर ही आकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी और आज तीन बार मिलने वाली असफलता के बाद मुझे सिविल सर्विसेज के 2022 के रिजल्ट में सफलता मिली है.
घर पर ही रहकर की थी 8 से 10 घंटे की पढ़ाई
पिछड़े क्षेत्र नारौली डांग से आईएएस बनने वाले बेटे हिमांशु नें सिविल सर्विसेज की तैयारी घर पर ही रहकर की थी. हिमांशु का कहना है कि यूपीएससी की तैयारी करने के लिए लोग दिल्ली जाते हैं. वहां जाकर रहते हैं और कोचिंग करते हैं. लेकिन मैंने अपनी यूपीएससी की तैयारी घर पर ही 8 से 10 घंटों की पढ़ाई में की थी और इस सब में मेरे परिवार का बहुत बड़ा रोल रहा है. मेरे पापा मम्मी, बहन भाई इन सभी ने मुझे घर पर ही पढ़ाई का इतना अच्छा माहौल उपलब्ध कराया की. मुझे पढ़ाई के अलावा और कामों में शामिल ना होना पड़े.
2017 में देखा सपना 2023 में हुआ पूरा
हिमांशु ने अपनी इस सफलता पर कहा कि तीन बार मिलने वाली असफलता के बाद यूपीएससी 2022 के परिणाम में मिलने वाली सफलता में अब मुझे काफी अच्छा लग रहा है कि एक सपना जों 2017 में देखा था. वह आखिरकार आज पूरा हो गया है. मेरा तो सभी से यही कहना है कि दिक्कतें चाहे कैसी भी हो यदि हम मेहनत के दम पर कुछ ठान ले तो एक ना एक कठिन से कठिन मुकाम भी हासिल हो जाता है.
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FIRST PUBLISHED : May 31, 2023, 22:50 IST








