
राहुल दवे/इंदौर: “हम लाठी के माध्यम से मोबाइल, सोशल मीडिया सहित विदेशी गेम्स से दूर रहेंगे. अगर मोबाइल का उपयोग करेंगे तो सिर्फ पढ़ाई और सकारात्मक कामों के लिए करेंगे. जबकि लाठी का उपयोग देश और समाज की सुरक्षा के लिए करेंगे…” कुछ इसी तरह का संकल्प मल्हारगंज थाने के सामने स्थित एक गार्डन में बच्चों को अंकित यादव ने दिलाया, जो पेशे से एक पहलवान हैं और अखाड़े में कुश्ती लड़ते थे.
अब इन पहलवान का का मकसद आज के इस दौर में डिजिटल की तरफ जा रहे उन बच्चों पर ध्यान देना है, जो सोशल मीडिया, ऑनलाइन विदेशी गेम्स के चक्कर में फिजिकल की दुनिया को भूल गए हैं. अपनी प्राचीन कला और संस्कृति से दूर हो रहे हैं. इसके चलते अंकित मोबाइल एडिक्ट बच्चों को बाहर निकालकर भारत के प्राचीन व्यायाम का हुनर सीखा रहे हैं.
शस्त्र के साथ शास्त्र की शिक्षा
ट्रेनिंग रोज सुबह 8:00 बजे महल्लारगंज थाने के पास स्थित गार्डन में होती है. जहां लगभग 30 से 40 बच्चे और युवा पहुंचते हैं. अंकित बताते हैं कि बढ़ते अपराध और महिलाओं के खिलाफ बढ़ रही घटनाओं को देखते हुए उन्होंने युवाओं और बच्चों को आत्मरक्षा सिखाने का आइडिया आया था. इसके बाद उन्होंने क्षेत्र में ही ट्रेनिंग देनी शुरू की, जिसमें बच्चों ने बड़ा उत्साह दिखाया. ये बच्चे सुबह 7 बजे उठकर मैदान में पहुंच जाते हैं.
लाठी चलाना सिखाते हैं
आगे बताया कि अभी 5 साल के बच्चों से लेकर छात्राएं लाठी चलाना सीख रहीं हैं. अंकित यादव के अनुसार आज हमारी शस्त्र कला विलुप्त होती जा रही है. सिर्फ अखाड़ों में ही अब यह कला देखने को मिल रही है. बच्चे मोबाइल, सोशल मीडिया और मॉडर्न गेम्स में व्यस्त होते जा रहे हैं. इस तरह की ट्रेनिंग का उद्देश्य बच्चों को अपनी शस्त्र कला के बारे में बताना है. इस दौरान अब शस्त्र के साथ शास्त्र का भी ज्ञान देते हैं. बच्चों को महापुरुषों के बारे में बताने के साथ ही अपनी गौरवशाली संस्कृति से भी उन्हें रूबरू कराया जाता है.
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FIRST PUBLISHED : May 31, 2023, 16:05 IST








