Karnataka: भाजपा नेता अश्वथ नारायण को HC से राहत… सिद्धारमैया के खिलाफ बयान पर FIR दर्ज करने का मामला

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बेंगलुरु: कर्नाटक उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश पीठ ने भाजपा नेता सीएन अश्वथ नारायण को चार हफ्तों की अंतरिम राहत दी है. उन पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ भड़काऊ बयान देने का आरोप था. न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने नारायण के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें यह अंतरिम राहत दी है.

मैसुरू पुलिस ने एक हफ्ते पहले कथित आपराधिक धमकी और दंगा भड़काने के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी. जिसमें पूर्व मंत्री ने कथित तौर पर सिद्धारमैया के खिलाफ टिप्पणी करते हुए उनकी तुलना टीपू सुल्तान से की थी. उन्होंने कहा था कि उन्हें भी 18वीं सदी के मैसुरू के शासक की तरह ही समाप्त किया जाना चाहिए. यह टिप्पणी कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान की गई थी.

नारायण के वकील की सफाई
नारायण के वकील ने तर्क देते हुए कहा कि पहले गैर-संज्ञेय रिपोर्ट दर्ज की गई थी और शिकायतकर्ता खुद भी मौके पर मौजूद नहीं था, इसलिए दूसरी शिकायत संभव नहीं थी. वकील ने यह भी तर्क दिया कि सिद्धारमैया के खिलाफ जो भी बयान दिए गए, वह कर्नाटक विधानसभा चुनाव में उन्हें हराने के मकसद से दिए गए थे, उसका शब्दश: अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मामले में एक स्पष्टीकरण जारी किए जाने के बाद मामला शांत था लेकिन जैसे ही कांग्रेस पार्टी सत्ता में आई इसे फिर से लाया गया.

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बयान पर सफाई भी
बयान देने के बाद उस पर सफाई देते हुए अश्वथ नारायण ने कहा था कि उन्होंने तो सिद्धारमैया की तुलना टीपू सुल्तान से की थी. टीपू सुल्तान के प्रति सिद्धारमैया के झुकाव की बात कही थी, उनके बारे में कोई अपमानजनक बयान नहीं दिया. यह सिर्फ कांग्रेस पार्टी को हराने के लिए दिया गया एक बयान था. इसमें व्यक्तिगत कुछ नहीं था. फिर भी अगर उन्हें ठेस पहुंची तो मैं माफी मांगता हूं.

फैसले में क्या कहा गया
कर्नाटक उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने यह उल्लेख करते हुए मामले पर रोक लगाई कि दंगा भड़काने में अहम वजह यह होगी कि बयान या तो दंगे का कारण होना चाहिए या ऐसा करने में उसे सक्षम होना चाहिए, जबकि तीन महीने बाद भी कोई अप्रिय घटना नहीं हुई.

Tags: BJP, Karnataka, Karnatka High Court, Siddaramaiah

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Author: Up Head Line

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