
पुनीत माथुर/ जोधपुर. सूर्यनगरी अपनी स्थापत्य कला के लिए देश भर में अपनी पहचान बनाए हुए है. जोधपुर में एक ऐसी हवेली है जिसका निर्माण साल में महज 13 दिन होता था और इस हवेली को निर्माण में 21 साल लग गए. जी हां यह है जोधपुर की पुष्य नक्षत्र हवेली जो अपने आप में निर्माण की अनूठी कला का नमूना है.
पुष्य नक्षत्र हवेली का निर्माण कला स्काई स्थापत्य अपने आप में अलग है. हवेली के मालिक आनंद जोशी ने बताया कि इस हवेली का निर्माण 1890 ईस्वी में जोधपुर नरेश जसवंत सिंह द्वितीय के कामदार पुष्करणा रघुनाथ मल जोशी ऑफ भुरजी ने आरंभ करवाया था जो वर्ष 1911 तक चला. हवेली के लिए पत्थर पूरे साल भर तक आते-जाते और उन पत्थरो की चुनाई का काम महज पुष्य नक्षत्र के दिन किया जाता था. ख़ास बात यह है कि इस हवेली का निर्माण 1 साल में सिर्फ 13 दिन ही होता था. इस तरह 21 सालों में 273 दिन में पत्थरो की चुनाई कर इस हवेली को बनाया गया.
इस हवेली को लेकर एक डॉक्यूमेंट्री भी बनी है. हवेली के अंदर प्रवेश करते ही चौक में एक फूल है जहां जालियों के बीच इंग्लैंड के तातार तत्कालीन सम्राट किंग एडवर्ड की प्रतिमा लगाई गई है. एक खंभे पर रानी विक्टोरिया की मूर्ति लगी है. पत्थरों पर आकर्षक नक्काशी देखते ही बनती है. इस हवेली की देखरेख आज भी बड़ी सावधानी पूर्वक की जा रही है ताकि यह सही रुप में ही रहे.
पुष्य नक्षत्र का यह है महत्व
पुष्य नक्षत्र का सनातन धर्म में बहुत महत्व है. पुष्य नक्षत्र सुख समृद्धि और सौभाग्य का पोषक माना जाता है. इस नक्षत्र को दृश्य नक्षत्र भी कहा जाता है और दृश्य का अर्थ होता है शुभ. वहीं पुष्य नक्षत्र में पुष्य शब्द का अर्थ होता है शक्ति प्रदान करने वाला इस तरह पुष्य नक्षत्र शुभ और शक्ति प्रदान करने वाला होता है.
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FIRST PUBLISHED : May 31, 2023, 14:24 IST








