Nirjala Ekadashi 2023 Katha: 31 मई को निर्जला एकादशी, विष्णु पूजा के दौरान पढ़ें व्रत कथा, पाएं सभी एकादशी व्रतों का पुण्य

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हाइलाइट्स

इस दिन बिना अन्न और जल को ग्रहण किए व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं.
इस दिन पूजा के समय निर्जला एकादशी व्रत कथा को सुनते हैं या पढ़ते हैं.

Nirjala Ekadashi 2023 Vrat Katha: आज 31 मई बुधवार को निर्जला एकादशी व्रत है. इस दिन बिना अन्न और जल को ग्रहण किए व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करते हैं. निर्जला एकादशी का व्रत करने वाले को पूरे वर्ष के सभी एकादशी व्रतों के पुण्य के बराबर फल प्राप्त होता है. पाप मिटते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस दिन पूजा के समय निर्जला एकादशी व्रत कथा को सुनते हैं या पढ़ते हैं. श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी से जानते हैं जानते हैं निर्जला एकादशी व्रत कथा के बारे में.

निर्जला एकादशी व्रत कथा
पौराणिक क​था के अनुसार, एक बार भीम ने वेद व्यास जी से कहा कि बड़े भाई युधिष्ठिर, अर्जुन समेत सभी अनुज एकादशी का व्रत रखने के लिए सुझाव देते हैं. वे भगवान की पूजा और दान तो कर सकते हैं, लेकिन समस्या यह है कि वे किसी भी दिन बिना भोजन के नहीं रह सकते हैं.

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तब व्यास जी ने भीम से कहा कि तुम हर माह में केवल दो एकादशी व्रत रखो और अन्न न खाओ. उन्होंने कहा कि हे पितामह! वे भूख बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं. यदि वर्ष भर में कोई एक व्रत हो तो उसके बारे में बताएं, वे उस व्रत को रख सकते हैं लेकिन हर माह दो व्रत रखना संभव नहीं है क्योंकि बिना भोजन के वे नहीं रह पाते.

भीम ने वेद व्यास जी से कहा कि आप वर्ष में केवल एक बार ही रखे जाने वाले व्रत के बारे में बताएं, जिसको करने से स्वर्ग की प्राप्ति हो जाए. व्यास जी ने कहा कि माह के दो एकादशी व्रत मोक्ष प्राप्ति के लिए रखते हैं. इस पर भीम ने कहा कि साल में एक बार उपवास रखकर मुक्ति पाने वाले व्रत के बारे में बताएं.

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तब व्यास जी ने कहा कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी निर्जला होती है, इसलिए उसे निर्जला एकादशी कहते हैं. तुम निर्जला एकादशी का व्रत रखो. इस व्रत में जल का ग्रहण करना वर्जित है. भोजन करना भी मना है. यदि तुम निर्जला एकादशी के सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक निर्जला व्रत रहते हो तो साल भर के सभी एकादशी व्रतों का पुण्य फल प्राप्त हो सकता है.

व्यास जी ने कहा कि निर्जला एकादशी के बारे में भगवान ने उनको बताया था. इस एकादशी व्रत का फल सभी तीर्थ और दान से भी अधिक है. इस व्रत से व्यक्ति पाप मुक्त हो जाता है और मृत्यु के बाद देवदूत उसे स्वर्ग लेकर जाते हैं. निर्जला एकादशी पर ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें और गौ दान करें.

व्यास जी की बताई ​विधि के अनुसार ही भीम ने निर्जला एकादशी व्रत किया. इस वजह से निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं. निर्जला एकादशी व्रत कथा को पढ़ने और सुनने वाले भी स्वर्ग प्राप्त करते हैं.

Tags: Dharma Aastha, Lord vishnu

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Author: Up Head Line

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