इस हवेली में बीता था मशहूर शायर ‘गालिब’ का अंतिम समय, सरकार ने घोषित किया राष्ट्रीय विरासत भवन

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गौहर / दिल्ली. उग रहा है दर-ओ-दीवार से सब्ज़ा ग़ालिब, हम बयाबाँ में हैं और घर में बहार आई है, यह शेर मशहूर शायर गालिब का है. आज हम आपको पुरानी दिल्ली स्थित ‘गालिब’ की हवेली के बारे में बताएंगे. यहां गालिब ने अपने जीवन का 1860 से लेकर 1869 तक का अंतिम समय गुज़ारा था. एक समय यह हवेली लगभग खत्म हो चुकी थी. यहां पर की दुकानें भी बन चुकी थी, पर सरकार नें सही समय रहते हुए इसे वापिस बनवाया और इसे एक राष्ट्रीय विरासत भवन (National Heritage Building) भी घोषित किया.

लोग लाल किला, कुतुब मीनार इन सब जगह तो जाते हैं, पर इस ऐतिहासिक हवेली के बारे में लोगों को काफी कम जानकारी है. हम भी जब वहां पहुंचे तो पता चला कि इस हवेली को देखने के लिए कोई टिकट नहीं है फिर भी लोग इसे भुला चुके हैं. उस समय की याद दिलाने के लिए हवेली को उसी पुराने तरीके से बनवाया गया है. हवेली के अंदर जाते ही पहले कमरे में आपको ग़ालिब की एक मूर्ति दिखेगी जिसके साथ-साथ ग़ालिब की जिंदगी के बारे में काफी कुछ पढ़ने को मिलेगा. यहां दीवारों पर उस समय की याद दिलाने के लिए पुराने कपड़े भी टांगे गए हैं. गालिब के हाथों से लिखी गई किताबें भी आपको यहां देखने को मिलेंगी जो पानी पड़ने के कारण थोड़ी नष्ट हो गई हैं.

गालिब से जुड़ी कुछ ख़ास बाते

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यहां दीवारों पर ‘गालिब’ के कई मशहूर शेर, और उनकी जिंदगी के बारे में काफी कुछ लिखा गया है. वहीं गालिब की जिंदगी की कुछ दिलचस्प बातें भी आप यहाँ पढ़ सकते हैं. जैसे कि ‘गालिब को खाने में’ तले कबाब, दाल मुरब्बा, भुना गोश्त, शाम्मी कबाब, बेसन की कढ़ी और पकौड़ियां, चने की दाल, चटनी, अचार, सिरका, सोहन हलवा, आम मिश्री, पिसे हुए बादाम, और हुक्का पसंद था. ‘ग़ालिब’ के कई शौक भी थे जैसे की पतंगबाजी, चौसर और शतरंज खेलना, आदि यह सब बातें ‘गालिब’ को और भी ज्यादा दिलचस्प बना देती हैं.

कब और किस समय जा सकते हैं

इस ऐतिहासिक हवेली को देखने के लिए सुबह 11:00 बजे से लेकर शाम को 6:00 बजे तक जा सकते हैं. यह हवेली सोमवार और सरकारी छुट्टी वाले दिन बंद रहती है. अंत में जाते हुए विख्यात ‘ग़ालिब’ विद्वान ‘राल्फ रसल’ की इन पंक्तियों के साथ हम आप को छोड़ रहे हैं कि उन्होंने कहा था कि यदि ‘गालिब’ अंग्रेजी भाषा में लिखते, तो विश्व और इतिहास के महानतम कवि होते.

Tags: Delhi news, Heritage, History, Poet, Tourist Places

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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