
हिमांशु नारंग/करनाल: गंगा दशहरा पर श्रद्धालु गंगा के तट पर पुण्य की डुबकी लगाते हैं, वहीं करनाल में भी इस पर्व को धूमधाम से मनाया जाता रहा है. मंगलवार को इस अवसर पर इंद्री के साथ बहती यमुना नदी में भी श्रद्धालु स्नान कर अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए प्रार्थना करते नजर आए.
गंगा दशहरा के अवसर पर आज बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने करनाल के इंद्री में यमुना नदी में स्नान करके मनोकामना पूर्ण करने के लिए प्रार्थना की. श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ ऐतिहासिक नबियाबाद गुरुद्वारा के पास बने घाट पर देखने को मिली. माना जाता है कि जब यमुना में बाढ़ आती है तब भी इस गुरुदवारे में बाढ़ का पानी नहीं आता. जबकि यमुना गुरुद्वारा से मात्र 100 गज की दूरी पर है. यहां से यमुना नदी का पानी भी शांत होकर गुजरता है.
हिंदू धर्म में गंगा दशहरे का बहुत महत्व है. हर साल गंगा दशहरा बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मां गंगा की पूजा-अर्चना की जाती है. गंगा दशहरा को गंगावतरण दिवस भी कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं. इसी दिन मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था. भागीरथ अपने पूर्वजों की आत्मा का उद्धार करने के लिए गंगा को पृथ्वी पर लेकर आए थे. इसी कारण गंगा को भागीरथी भी कहा जाता है.
वहीं करनाल में श्रद्धालुओं की आस्था यमुना नदी से जुड़ी है. यही कारण है कि गंगा दशहरे के दिन लोग अपनी आस्था जताते हुए यहां पर स्नान करते हैं. मान्यता है कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी को हस्त नक्षत्र में मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था. इसी दिन भागीरथ उन्हें धरती पर लाए थे.
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FIRST PUBLISHED : May 30, 2023, 19:57 IST








