
मुकेश राजपूत, बुलंदशहर. उत्तर प्रदेश के जनपद बुलंदशहर के गांव नरसेना में गौमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती शोध केंद्र पर गाय के मूत्र पर शोध करने के बाद जैविक खाद व कीटनाशक बनाए जा रहे हैं. किसानों व गोशालाओं से 10 रुपये लीटर गौमूत्र खरीदकर गौमूत्र का शोध करने के बाद किसानों की फसलो के लिए खाद व फसलों में लगने वाले रोगों के लिए दवाई बनाई जा रही है. जिससे किसानों को कम कीमत पर खाद व फसलों के लिए जैविक कीटनाशक बनाया जा रहा है. वहीं गौमूत्र की खरीदारी से किसानों व गोशालाओं को मुनाफा भी पहुँचाया जा रहा है.
गौमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती रिसर्च सेंटर के संचालक डॉ प्रवीण कुमार बताया कि वह सन 2014 से शोध कर रहे हैं. उनके पास अपनी ऑर्गेनिक लैब है और उनके पास कई सौ जड़ी बूटियों का संग्रह है और अपने फार्मूले डिवेलप किए हैं. डॉ प्रवीण कुमार ने कहना है कि वह किसानों से 10 रूपये लीटर गौमूत्र खरीदकर गौमूत्र से पांच फार्मूले बनाए हैं. जिनके उनके पास तीन दवाइयां अभी चल रही हैं.
पहली दवाई- नेक्टर( यह दवाई प्लांट ग्रोथ प्रमोट), दूसरी-इंसेक्ट्रीसाइड (इंसेक्ट को मैनेज करती है), तीसरी दवाई- फंगीसाइड (फफूंद या फंगस को मैनेज करने का काम करती है) तथा एक दानेदार है जब फसल बड़ी हो जाती है तो इसे बिखरने पर फसल को फायदा करती है. जिससे किसानों की फसल को बहुत लाभ होता है. इस विधि द्वारा किसानों को कम कीमत पर खाद व फसलों के लिए जैविक कीटनाशक उपलब्ध होगा.
किसानों की आमदनी बढ़ी
वहीं गौमूत्र की बिक्री से किसानों व गोशालाओ में हो रही चारे की समस्या का भी समाधान होगा और खेतों में इसके छिड़काव से सभी प्रकार के कीटों पर नियंत्रण में मदद मिलती है. साथ ही पत्ती खाने वाले, फल छेदन तथा तना छेदक जैसे अधिक हानि पहुंचाने वाले कीटों के प्रति इसका उपयोग अधिक लाभकारी है. गौमूत्र कीटनाशक, खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता और उसके स्वाद को बनाए रखने, खेती की उर्वरा शक्ति के साथ-साथ कृषि पर्यावरण एवं स्वास्थ्य के लिए बेहतर है.
हालांकि डॉ प्रवीण कुमार ने बुलंदशहर जिला प्रशासन का भी सहयोग बताते हुए कहा कि जिला प्रशासन ने उन्हें पूर्व में भी सहयोग किया है और अभी भी जिला प्रशासन की तरफ से सहयोग किया जा रहा है.
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FIRST PUBLISHED : May 30, 2023, 08:24 IST








