उमाकांत मालवीय की बाल कविताएं- ‘हम टेढ़े-मेढ़े भी हैं तो क्या, लड्डू हैं घी के’

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उमाकांत मालवीय हिंदी के प्रतिष्ठित कवि और गीतकार थे. उन्होंने पौराणिक सन्दर्भों की आधुनिक व्याख्या करते हुए उन्होंने अनेक मिथकीय कहानियां और ललित निबंधों की रचना की है. उनकी बच्चों पर लिखी पुस्तकें भी बेजोड़ हैं. प्रस्तुत हैं उनकी कुछ बाल कविताएं-

गलड़के: हम टेढ़े-मेढ़े भी हैं तो क्या,
लड्डू हैं घी के।

लड़कियांः तुम ऊंची दूकानों वाले,
पकवान निरे फीके।

लड़के: हो लाख भले चूहाखानी,
पर चुहिया से डरती।
मरने से पहले डरपोकों की,
सौ मौतें मरती।
पूछो इन जीने वालों से,
यूं क्या होगा जी के।
हम टेढ़े-मेढ़े भी हैं तो क्या,
लड्डू हैं घी के।

लड़कियां: तुम सौ मुक्के में पापड़ तोड़ो,
तीस मार खां जी।
बस पानी पड़े बताशे जैसे,
गल जाते ‘प्रा’ जी।
हम मरने वाले नहीं भले,
कोसो पानी पी के।
तुम ऊंची दूकानों वाले,
पकवान निरे फीके।

लड़के: जनमी लड़की, पर फैशन में,
बनती भाई साहब।
इन लड़केनुमा लड़कियों से,
क्या होगा भी या रब।
जैसे बिल्ली के भाग खुले हैं,
टूट गए छींके!
हम टेढ़े-मेढ़े भी हैं तो क्या,
लड्डू हैं घी के!

लड़कियां: जनमे लड़के, पर फैशन में,
तुम हीरोइन बनते।
इन लड़कीनुमा बालकों से
क्या होगा भी भंते।
मूली के पत्ते देख जिन्हें,
आ जाती हैं छींकें।

लड़के: तुम प्यारी प्यारी बहना हो,
हम बीरन हैं जी के।

लड़कियां: तुम प्यारे-प्यारे बीरन,
भैया दोयज के टीके।
—-
कौड़ी एक उधार की

सात समंदर पार की,
कौड़ी एक उधार की।
ले आया नटखट बंदर,
छोड़ दिया भालू के घर।
धन्ना सेठ बना भालू,
अकडूं खाँ औ’ झगड़ालू।
जिसे नसीब न ठेला था
उसको ज़िद है कार की।
सात समंदर पार की,
कौड़ी एक उधार की।
————
मचा तहलका

बैठ पेड़ पर मछली सोचे
अब क्या होगा राम,
नज़ला हुआ मगर मामा को
मुझको हुआ जु़काम।

छांय छांय कर मेढक जी ने
छींका क्या दो बार,
पोखर भर में मचा तहलका
मेढक जी बीमार।

भागा पोखर से तब कछुआ
सिर पर रखकर पांव,
लेकिन देखा छांय-छांय कर
छींके सारा गांव।
—

लंगूर की शादी

शादी है लंगूर की,
दावत मोतीचूर की।
ऊदबिलाव बना सहबाला,
घोड़ा लाया टमटम वाला।
सेहरा सोहे, तन मन मोहे,
बांकी शकल हुजूर की।
शादी है लंगूर की,
दावत मोतीचूर की।
—
नवगीत आंदोलन के उन्नायकों में से एक उमाकांत मालवीय के प्रमुख नवगीत संग्रहों में ‘मेहंदी और महावर’, ‘सुबह रक्त पलाश की’ और  ‘एक चावल नेह रींधा’ शामिल हैं. ‘देवकी’ और ‘रक्तपथ’ उनके काव्य संग्रह हैं और ‘अभिशप्त अमरबेलि’ खंड काव्य है. 19 नवम्बर, 1982 को 51 वर्ष की अल्पायु में इलाहाबाद में उनका निधन हो गया. यश मालवीय और अंशु मालवीय उनके बेटे हैं और वर्तमान में सुपरिचित कवि हैं.

Tags: Hindi Literature, Hindi poetry, Hindi Writer, Literature

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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