राजस्थानी संस्कृति के रंग में रंगे विदेशी पर्यटक, नृत्य शिविर में सीख रहे लोक नृत्य

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निशा राठौड़/उदयपुर. बदलते दौर में विलुप्त होती राजस्थान की लोक कलाओं से जहां युवा अपनी दूरी बना रहे हैं और बॉलीवुड-हॉलीवुड के गानों पर झूमते नजर आ रहे हैं. वहीं, यहां आने वाले विदेशी पावणे इस कला के रंग में रंगते जा रहे हैं. उदयपुर के जगदीश चौक स्थित विरासत प्रांगण में इन दिनों राजस्थानी लोक नृत्य की निःशुल्क क्लास दी जा रही, जिसमें खासतौर पर विदेशी पर्यटक शामिल हो रहे हैं.

दरअसल, विजयलक्ष संस्थान हर रविवार को निःशुल्क लोक नृत्य प्रशिक्षण शिविर का आयोजन कर रहा है. यह शिविर सुबह 11 से 2 बजे तक सिटी पैलेस के पास जगदीश चौक स्थित विरासत प्रांगण में चल रहा है. इसमें अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकार एवं संगीत नाटक अकादमी जोधपुर से सम्मान प्राप्त कोरियोग्राफर विजयलक्ष्मी आमेटा घूमर, चरी, गणगौर, भवाई ट्रेनिंग दे रहे हैं. शिविर में विदेशी पर्यटक भी शामिल हो रहे हैं. उनमें भी लोक नृत्य सीखने का क्रेज देखा जा रहा है.

लोक संस्कृति को बचाने का प्रयास

कोरियोग्राफर विजय लक्ष्मी बताती हैं कि इस डिजिटल युग में राजस्थान की संस्कृति, त्यौहार और विभिन्न मेलों पर किए जाने वाले नृत्य धीरे-धीरे अपना मूल स्वरूप खोते जा रहे हैं. राजस्थान के मानचित्र में उदयपुर झीलों की नगरी के साथ अपनी बहुरंगी संस्कृति के लिए विश्व में प्रसिद्ध है. इसलिए यहां की स्थानीय युवतियों और महिलाओं को घूमर, चरी, गणगौर, कालबेलिया जैसे नृत्य सीखना और आना जरूरी है. यहीं संस्कृति हमारी पहचान भी है, लेकिन युवाओं में इसके प्रति उदासीनता नजर आती है. ऐसे में इस शिविर के जरिए लोक संस्कृति को संरक्षित करने का एक प्रयास है.

शिविर में 8 साल के बच्चों से लेकर 60 साल तक कोई भी शामिल हो सकता हैं. वर्तमान में 30 सदस्यों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. 30 मार्च से शुरू हुए शिविर का समापन 30 जून को होगा. अभी लोगों की डिमांड को देखते हुए शिविर का समय सुबह ज्यादा जल्दी किया जाएगा.

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FIRST PUBLISHED : May 29, 2023, 11:00 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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