आज दिल्‍ली में सजेगा दरबार, गहलोत और पायलट भी होंगे शामिल, सबको ‘रिजल्‍ट’ का इंतजार – News18 हिंदी

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जयपुर. राजस्थान कांग्रेस में अंतर्कलह पर दिल्ली में सोमवार को पार्टी की अहम बैठक होने जा रही है. इसमें पार्टी के तमाम कद्दावर नेता पार्टी आलाकमान के साथ बैठक कर सूबे में फिर से कांग्रेस की सरकार बनाने पर मंथन करेंगे. सचिन पायलट को भी बैठक में बुलाया गया है. माना जा रहा है कि बैठक में पायलट-गहलोत के बीच जारी विवाद का कुछ न कुछ हल निकालने की कोशिश की जाएगी. कांग्रेस की इस महत्‍वपूर्ण बैठक में पार्टी में पायलट का भविष्य भी तय होने की उम्‍मीद है. इस बीच, राजस्‍थान कांग्रेस के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने अपने सुर नरम करते हुए कहा कि सचिन पायलट ने पार्टी को कोई अल्‍टीमेटम नहीं दिया है.

दिल्ली में सोमवार को कांग्रेस की बैठक होने जा रही है. वहीं, पार्टी के राजस्‍थान प्रभारी सुखजिंदर रंधावा जयपुर में डेरा डाले हुए थे. सत्ता और संगठन के नेताओं के साथ उन्‍होंने मैराथन बैठकें कीं. माना जा रहा है कि इन बैठकों में दिल्‍ली बैठक के एजेंडे तय किए गए. राजस्थान फतह करने के इरादों के साथ कांग्रेस आलाकमान सूबे के सियासी सूरमाओं के साथ दिल्ली में बड़ी बैठक करने जा रहा है. गहलोत के साथ पायलट भी बैठक का हिस्सा होंगे. यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब सचिन पायलट ने अपनी ही पार्टी की सरकार को 30 मई तक का अल्टीमेटम दे रखा है. पायलट समर्थक मंत्री राजेंद्र गुढा अपनी ही सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए सबूत तक होने की बात कह रहे हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन हालात में पार्टी कैसे पायलट और गहलोत के रिश्तों के बीच जमीं तनाव की बर्फ को पिघला पाएगी, इस पर सबकी निगाह है. प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर रंधावा का दावा है कि हालात जल्द नियंत्रण में आएंगे. पायलट के अल्टीमेटम को वह कांग्रेस पार्टी का अल्टीमेटम मानने से ही इंकार कर रहे हैं.

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पायलट की मांगें
गहलोत सरकार अपनी लोककल्याणकारी योजनाओं के दम पर फिर से सत्ता हासिल करने की हुंकार भर रही है. मंहगाई राहत कैंपों के जरिये आम जनता का भरोसा जीतने की कोशिश हो रही है. 15 मई को पायलट ने जन संघर्ष यात्रा की समाप्ति पर आयोजित जलसे में गहलोत सरकार के सामने 3 मांगें रखी थीं. पहला, वसुंधरा सरकार में हुए भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच. दूसरा, आरपीएससी को भंग किय जाए और तीसरी मांग पेपर लीक से प्रभावित अभ्‍यर्थियों को मुआवजा देने की है. सरकार की ओर से पायलट की इन मांगों पर 10 दिन बाद भी कोई बयान तक नहीं आया. सीएम गहलोत जनता के बीच मिल रहे जनसमर्थन से प्रदेश के 21 जिलों का दौरा कर चुके हैं और जनता से मिल रहे फीडबैक से बेहद उत्साहित नजर आ रहे हैं.

पायलट पर सस्पेंस होगा खत्म?
सचिन पायलट और उनके नजदीकी मंत्री राजेंद्र गुढा के दिये बयानों पर पार्टी आलाकमान चर्चा जरूर करेगा. सूत्रों के मुताबिक, पायलट और गुढा के रणघोष से दिल्ली अंजान नहीं है. माना जा रहा है कि पायलट कांग्रेस पार्टी में बने रहने के लिए आलाकमान के सामने ऐसी शर्तें रख रहे हैं, जिन्हें मानना पार्टी के लिए संभव नहीं है. पायलट कैंप पीसीसी अध्यक्ष के साथ अपने खेमे से डिप्टी सीएम चाहता है. साथ ही गहलोत की जगह किसी और को मुख्यमंत्री बनाने की उनकी मांग है. जानकार मानते हैं कि पायलट पार्टी को उनपर कार्रवाई करने के लिए उकसा रहे हैं, ताकि उनपर एक्शन होने की दशा में वह जनता के बीच हमदर्दी हासिल कर सकें पर कांग्रेस उन्हें यह माइलेज देना नहीं चाहती है. पार्टी कोई एक्शन लेने के बजाय इस प्रकरण को ठंडे बस्ते में डाले रखना चाहती है, ताकि पायलट खुद ही परेशान होकर पार्टी छोड़ दें. इसमें पार्टी अपना फायदा देख रही है. पायलट के पार्टी छोड़ने या पार्टी में बने रहने पर भी सस्पेंस खत्म होने की उम्मीद है. पायलट के नजदीकी विधायक मुकेश भाकर का कहना है कि हम कहीं नहीं जाएंगे, कांग्रेस में ही रहकर गहलोत सरकार की छाती पर मूंग दलेंगे.

कर्नाटक चुनाव में जीत से सीख
पार्टी आलाकमान कर्नाटक में मिली ऐतिहासिक जीत से मिले तजुर्बे से सीख ले रहा है. चुनावी राज्यों के नेता प्रजेंटेशन देंगे और आलाकमान के सामने तमाम लंबित मुद्दों को सुलझाने की कोशिश होगी. पार्टी जीत का रोडमैप बनाएगी. धरातल पर काम को ही चुनाव में मुद्दा बनाने की कोशिश होगी. धार्मिक और भावनात्मक मुद्दों को तवज्जो देने से पार्टी परहेज करेगी, क्योंकि पीएम मोदी के लगातार दौरों से भाजपा आक्रामक है. वहीं, कांग्रेस अब अपने काम को जीत का आधार बनाकर चुनावी मैदान को फतह करने की तैयारी में जुटेगी.

Tags: Chief Minister Ashok Gehlot, Rajasthan news, Sachin pilot

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Author: Up Head Line

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