
जयपुर. राजस्थान में कोल्ड वॉर थमने का नाम ही नहीं ले रहा. दिल्ली में होने वाली बैठक के गुरूवार शाम स्थगित होने की खबर आने से पहले ही सीएम अशोक गहलोत ने बड़ा बयान देकर सूबे की सियासत में हलचल पैदा कर दी. मुख्यमंत्री ने विपक्ष की आड़ में पायलट पर शब्दों के ऐसे बाण छोड़े की समझने वाले समझ गये, जो नहीं समझ पाया वो अलग-अलग अर्थ लगाते रह गए. सीएम ने पेपर लीक से प्रभावित हुए अभ्यर्थियों के लिए मुआवजा मांगने वाले नेता को विपक्ष का बताया. सीएम गहलोत का बयान ऐसे वक्त आया जब प्रदेश के सियासी दिग्गज जल्द पार्टी आलाकमान के साथ बैठकर फिर से सूबे में हाथ का परचम लहराने की तैयारी में है. मीटिंग भले ही कुछ दिन के लिए टल गई हो, मगर गहलोत सरकार पार्टी आलाकमान के सामने भव्य प्रजेंटेशन देने तैयार है.
इस रिपोर्ट में सरकार की योजनाओं से लाभान्वितों के अनुभव को साझा किया जाएगा. धरातल का फीड़बैक आलाकमान तक पहुंचाया जाएगा और एक बार फिर सीएम गहलोत के नेतृत्व में सूबे में सरकार बनाने की तैयारी दिखाई जाएगी. पर जो गुरूवार शाम को हुआ इससे देख और सुन लोग रह गए. लगता यही है कि पायलट भले ही आलाकमान की बुलाई बैठक में शामिल हो जाएं, मगर सीएम गहलोत किसी भी सूरत में पायलट को कांग्रेस में बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे.
मुख्यमंत्री ने सचिन पायलट पर साधा निशाना
सचिन पायलट की राहें अल्टीमेटम की 30 मई को मियाद पूरी होने के बाद जुदा होना फिलहाल तय माना जा रही है. पायलट स्वीकार कर चुके हैं कि वो सीएम गहलेात को हटाना चाहते हैं. सूत्रों के मुताबिक अब पायलट कांग्रेस में बने रहने के लिए पीसीसी चीफ को बदलवाना चाहते हैं और अपने चहेते नेताओं को कार्यकारी अध्यक्ष या डिप्टी सीएम के रूप में देखना चाहते हैं. मगर लगता नहीं कि उनके पक्ष में विधायकों की कम संख्या आलाकमान को उनकी मांगें मानने पर मजबूर करेगी, इसलिए गहलोत पायलट को निशाने पर लेकर साफ बताना चाहते हैं कि पायलट के लिए मेरे रहते कांग्रेस में कोई जगह नहीं है. सीएम गहलोत के बयान का कांग्रेस के नेता भी समर्थन करते दिखाई दिए.
आपके शहर से (जयपुर)
एक तरफ सीएम गहलोत प्रदेश भर में ताबड़तोड़ दौरे कर सरकार के मंहगाई राहत कैंपों के दम पर जनता का भरोसा जीतने की कवायद में जुटे हैं तो पायलट कैंप भावी रणनीति में. अटकलें हैं कि जून में पायलट सूबे की सियासत में नई उड़ान भरेंगे. उनकी नई पार्टी अस्तित्व में आएगी. मगर कांग्रेस छोड़ने से पहले पायलट गहलोत का भी सियासी नुकसान करने की भरसक कोशिश करेंगे. मगर पार्टी छोड़ने से पहले वो सियासी शहीद कहलाना पसंद करेंगे ताकि जनता में उनको सहानुभूति मिल सके. शायद उनका यह ख्वाब भी सीएम गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार पूरा करने के कतई मूड में नहीं है और पार्टी उन्हें खुद ही सियासत के नए घर में शिफ्ट होने के लिए मजबूर करती दिखाई दे रही है.
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FIRST PUBLISHED : May 26, 2023, 17:18 IST








