राजगीर की सोनभंडार गुफा में छिपे हैं कई रहस्य! यहां खजाना या ऋषि मुनियों का अड्डा? सस्पेंस बरकरार

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

मो. महमूद आलम/नालंदा. बिहार का नालंदा प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है. यहां कई ऐसी दार्शनिक जगह हैं जो अपने आप में इतनी रहस्यमय हैं कि आज जब विज्ञान इतनी तरक्की कर चुका है, फिर भी इनके रहस्यों को सुलझाया नहीं जा सका है. नालंदा में एक छोटा सा नगर है राजगीर, जो कई मायनों में मत्त्वपूर्ण है. यहां पांच पहाड़ों पर भव्य जैन मंदिर हैं. राजगृह की सोन भंडार गुफा पुरातात्त्विक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है. यह गुफा राजगृह के वैभवगिरी पर्वत के पूर्व-दक्षिण पहाड़ मूल में है, जो नगर के दक्षिण-पश्चिम की ओर गया मार्ग पर अवस्थित है.

बिंबिसार ने बड़े पहाड़ को काटवाकर बनवाई गुफा

मान्यता है कि मौर्य शासक बिंबिसार ने अपने शासनकाल में राजगीर में एक बड़े पहाड़ को काटवाकर अपने खजाने को छुपाने के लिए गुफा बनवाई थी. जिसे आज तक कोई नहीं खोल पाया. खजाना छुपा होने के कारण इस गुफा का नाम  “सोन भंडार” पड़ा था. कुछ लोग इसे पूर्व मगध सम्राट जरासंघ की गुफा भी बताते हैं. यहां की दीवार पर शंख लिपि में एक लेख लिखा हुआ है. कहते हैं कि इस लेख में दरवाजा खोलने की विधि लिखी है, जो यह लेख पढ़ लेगा वह सोने के भंडार का दरबाजा खोल लेगा. अंग्रेजों ने इस गुफा को तोप के गोले से उड़ाने की कोशिश की थी, लेकिन वे इसमें नाकामयाब रहे. आज भी इस गुफा पर उस गोले के निशान देखे जा सकते हैं. अंग्रेजों ने इस गुफा में छुपे खजाने को पाने के लिए यह कोशिश की थी, लेकिन वह जब नाकाम हुए तो वापस लौट गए.

सोन मतलब सुरंग और भंडार का मतलब गुफा

टूरिस्ट गाइड रविशंकर उपाध्याय बताते हैं इसे सोन भंडार कहा जाता है. लोगों का मानना है कि यह सोने का भंडार है, लेकिन जो बोर्ड पर लिखा हुआ है सोन भंडार उसका मतलब सोन मतलब सुरंग और भंडार का मतलब टर्नल यानी गुफा है. इसके बगल से एक गर्म पानी का झरना बहता है. उसी के पास से जब 565 सीढ़ी चढ़कर ऊपर जाएंगे तब वैभवगिरी पर्वत मिलेगा. इसी के बगल में दो गुफाएं सप्तरणी और विप्ली हैं. जब भगवान बुद्ध की मृत्यु हुई थी, तब उसी गुफा में 3 महीने के बाद बौद्ध सम्मेलन किया गया था. जिसमें 500 बौद्ध भिक्षु मौजूद थे. बौद्धों का धार्मिक पुस्तक सुत्तपिटक, विनयपिटक और अभिधम्मपिटक लिखी गई. माना जाता है कि इस गुफा में जैन मुनि तपस्या करते थे. जब अंग्रेजों का साशन आया और उसे पता चला कि इसके भीतर खजाना है तो उन्होंने इसे तोड़ना लूटना चाहा, लेकिन वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सके.

.

FIRST PUBLISHED : May 25, 2023, 12:48 IST

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें