
हाइलाइट्स
समय से पहले एफडी तुडवाने पर कम ब्याज मिलता है.
इसके साथ ही ब्याज पर पेनल्टी भी देनी होती है.
एुफडी कराते वक्त प्री मैच्योर नियमों को जान लेना चाहिए.
नई दिल्ली. फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) पर वर्षों से लोगों का भरोसा कायम है. लोग 2 कारणों से एफडी में निवेश करते हैं. पहला है कम जोखिम और दूसरा है गारंटीड रिटर्न. एफडी का एक और फायदा भी है. जरूरत पड़ने पर आप इसमें से अपना पैसा आप कभी भी निकलवा सकते हैं. इसे प्री-मैच्योर विद्ड्रॉल (FD Premature Withdrawal) कहते हैं. एफडी तुड़वाने के कुछ नुकसान है. ऐसा करने पर जहां ब्याज कम मिलता है, वहीं पेनल्टी भी चुकानी पड़ती है. अलग-अलग बैंक की पेनल्टी भी भिन्न-भिन्न है. जुर्माना 0.5 फीसदी से 1 फीसदी तक हो सकता है. पेनल्टी मिलने वाले ब्याज पर लगती है, न की कुल रकम पर.
समय से पहले एफडी तुड़वा रहे हैं तो आपको प्रभावी ब्याज दर वह नहीं मिलेगी, जिस पर एफडी अकाउंट खोला गया था. बैंकिंग की भाषा में इसे बुक्ड रेट कहा जाता है. एफडी तुड़वाने पर बुक्ड रेट की बजाय कार्ड रेट पर ब्याज दिया जाता है. कार्ड रेट का मतलब है कि जितनी अवधि बाद एफडी तुड़वाई गई है, उस अवधि में की एफडी पर जो ब्याज बैंक दे रहा है, वहीं ब्याज दिया जाएगा. साथ ही उस ब्याज पर पेनल्टी भी लगाई जाएगी. पेनल्टी के चलते प्रभावी ब्याज दर घट जाने से एफडी को समय से पहले तुड़वाना महंगा पड़ता है.
5 साल की एफडी साल में तुड़वाने पर कितना नुकसान
एफडी की अवधि 5 साल है लेकिन उसे आप एक साल बाद तोड़ते हैं तो आपको लेकिन 1 साल में तोड़ते हैं तो आपको कितना और कैसे नुकसान होगा इसे एक उदाहरण से समझते हैं..
निवेश: 1 लाख रुपये
एफडी की अवधि: 5 साल
5 साल पर ब्याज: 7 फीसदी
1 साल पर ब्याज: 6 फीसदी
अब यहां एक साल बाद एफडी तुड़वाने पर आपको 7 फीसदी ब्याज नहीं मिलेगा. बल्कि आपको कार्ड रेट के हिसाब से 6 फीसदी ब्याज मिलेगा. अब इस छह फीसदी ब्याज पर भी आपको 1 फीसदी पेनल्टी देनी होगी. इस तरह आपको प्रभावी ब्याज केवल पांच फीसदी ही मिलेगा. जबकि, अगर आप 5 साल बाद पैसा निकालते तो आपको 7 फीसदी सालाना की दर से ब्याज 7000 रुपये ब्याज मिलता. वहीं प्री-मैच्योर विड्रॉल पर आपको पांच फीसदी के हिसाब से केवल 5 हजार रुपये ही मिलेंगे.
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Tags: Business news in hindi, FD Rates, Fixed deposits, Personal finance
FIRST PUBLISHED : May 24, 2023, 21:40 IST








