हाइलाइट्स
दुनिया का पहला चुंबन 4500 साल पहले मेसोपोटामिया में लिया गया
शोधकर्ताओं का कहना है कि पहले ये माना जाता था कि चुंबन भारत से दुनिया में गया
वैसे कहा जाता है कि जब से मानव सभ्यता शुरू हुई. स्त्री और पुरुष इस धरनी पर आए तब से चुंबन भी शुरू हुआ. लेकिन शोधकर्ता लगातार ये पता लगाने में लगे थे कि कितने हजार साल पहले चुंबन का प्रचलन आमतौर पर लोगों के बीच शुरू हो चुका था.
शोधकर्ताओं के अनुसार प्राचीन मध्य पूर्व में 4500 साल पहले होंठ पर किस आम रिवाज में थी. हालांकि पहले के दस्तावेज कहते थे कि चुंबन 1000 साल पहले ही आमतौर पर सार्वजनिक तौर पर सामने आया.
लेकिन कुछ दस्तावेज ये भी कहते रहे हैं कि 3500 हजार पहले मानव चुंबन का रिवाज दक्षिण एशिया यानि भारत में आम हो चुका था. ग्रंथों और प्राचीन साहित्य और पत्थरों पर उकेरे गए चित्रों में ये बात सामने आई. माना जाता है कि चुंबन यानि किसिंग भारत से ही दुनिया में फैला.
मेसोपोटामिया प्रचलित था चुंबन
अब कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मिलकर इस पर खास काम किया है. उन्होंने प्रकाशित हुए अपने आर्टिकल में इस बात को बताया है.
ये आर्टिकल “जर्नल साइंस” में प्रकाशित हुआ है. जिसके लिए उन्होंने मेसोपोटामिया सोसायटी के तमाम शुरुआती दस्तावेजों का अध्ययन किया. उनका कहना है कि 4500 साल पहले मध्य पूर्व में चुंबन की परिपाटी खूब प्रचलित थी. सार्वजनिक तौर पर भी उनका प्रदर्शन होता था.

4500 साल पहले मध्य पूर्व में चुंबन की परिपाटी खूब प्रचलित थी. सार्वजनिक तौर पर भी उनका प्रदर्शन होता था.
हजारों साल पुरानी क्ले पट्टियों पर चित्र
मध्य पूर्व में 4500 साल पहले चुंबन उनके लिए कोई नई बात नहीं थी बल्कि जीवन के साथ आमोद प्रमोद का हिस्सा थी. प्राचीन मेसोपोटामिया वो जगह थी, जो यूफ्रेंटस और टिगरिस नदियों के बीच था, वहां से मानव संस्कृति की आरंभिक शुरुआत हुई. आज यहां पर इराक और सीरिया मौजूद हैं. यहां पर क्ले की पट्टियों पर चुंबन के चित्र मिलते हैं.
अंतरंगता जताने का तरीका था
हजारों साल पुरानी कई क्ले की पट्टियां अब भी मौजूद हैं. और इसमें ये दीख रहा है कि मध्य पूर्व में रोमांटिक अंतरंग रिश्तों में लोग किस तरह चूमते थे. ये रोमांटिक लाइफ का अनिवार्य हिस्सा था. शोधकर्ता डॉक्टर ट्रोएल्स कहते कहते हैं कि किसिंग की इन क्ले पट्टियों से लगता है कि मेसोपोटामिया में चुंबन दोस्ती और परिवार के सदस्यों के बीच अंतरंगता जताने का एक मुख्य जरिया भी रहा होगा.
उनका कहना है कि हो सकता है कि ये चुंबन तब किसी परंपरा की तरह रहे हों. ये पहले किसी एक खास क्षेत्र में रहे हों और फिर वहां से दूसरी जगहों पर फैल गए हों. ये निश्चित तौर पर प्राचीन संस्कृतियों और दुनिया में कई जगहों पर रहे होंगे.
हो सकता है कि ये चुंबन तब किसी परंपरा की तरह रहे हों. ये पहले किसी एक खास क्षेत्र में रहे हों और फिर वहां से दूसरी जगहों पर फैल गए हों.
इससे मानव में शरीर में अलग तरह से फील किया होगा
ये भी संभव है कि किस के जरिए मानव शरीर में एक खास तरह की तरंगे बहनी शुरू हुई हों और इसका रिएक्शन शरीरभऱ में हुआ हो. इससे शरीर की नई रोमांटिक स्थितियां शुरू हुई हों. रिसचर्स कहते हैं कि इससे दुनियाभर वायरेक्स 1 का फैलाव हुआ.
चिंपाजी भी ऐसा करते हैं
शोधकर्ताओं का ये भी कहना है कि बोनबोस और चिंपाजी जैसे मानव के नजदीकी जानवर भी किसिंग करते हैं. इससे ये पता लगता है कि किसिंग मानव के मूलभूत स्वाभाव से जुड़ा हुआ है. इसलिए ये सभी तरह की संस्कृतियों और दुनियाभर में पाया जाता है.
प्राचीन भारत में चुंबन शब्द के कंब का इस्तेमाल होता था.
वैदिक ग्रंथों में क्या कहा गया
वैदिक परंपरा में पिता में तीन बार नवजात शिशु के सिर को चूमता था. वैसे ये सही प्राचीन भारत में इसे तब चुंबन शब्द के तौर पर नहीं कहा जाता हैं. शायद इसके लिए कंब शब्द का इस्तेमाल होता था, जो सूंघने के सेंस में था. बाद में इसे चुंबन कहा जाने लगा. अर्थववेद में सुंघने शब्द का मतलब होठों के जरिए स्पर्श से रहा है.
ऋगवेद का क्या उल्लेख
ऋगवेद में स्पर्श का मतलब होठों से स्पर्श से ही है. वैदिक दौर में चुंबन को सही तरीके से पारिभाषित किया गया. चुंबन के साक्ष्य महाभारत और इस दौर की कहानियों में मिलते हैं. जब सिकंदर महान भारत आया तो उसने पहली बार चुंबन करते लोगों को भारत में देखा. उसे ये अच्छा लगा. फिर सिकंदर और उसकी सेना किसिंग को भारत से बाहर ले गए. कहा जाता है कि चुंबन की उत्पत्ति भारत में ही हुई थी. हालांकि कुछ ऐसे ही रीतिरिवाज अफ्रीका,मंगोल, मलय और उत्तर पूर्व में रहने वाले भारतीयों के बीच भी थे.
ग्रीस में चुंबन स्टेटस सिंबल
ग्रीस में चुंबन स्टेटस सिंबल के तौर पर इस्ते्माल हुआ. रोमन साम्राज्य में बराबर की स्थितियों वाले ही एक दूसरे का चुंबन कर सकते थे. वैसे बाइबल में भी अपोसले पाल लोगों से एक दूसरे का अभिवादन पवित्र चुंबन से करने को कहता है. लेकिन इस चुंबन का आशय हाथों और गालों पर किए जाने वाले चुंबन से था.
ईसाई शादियों में ये एक परंपरा
औपचारिक चुंबन को ओस्कुलम किस कहते हैं जबकि रोमांटिक चुंबन बेसियम किस कहलाता है लेकिन तीव्र चुंबन को सावोलियम कहते हैं, जिसे फ्रेंच किस भी कहते हैं. रोमन साम्राज्य से लोग यूरोप और अफ्रीका किसिंग मिशनरीज पर भेजे गए थे. रोमन दंपत्तियों के बीच रोमाटिंक किस का प्रचलन शुरू हुआ तो अब ये ईसाई शादियों में एक परंपरा ही बन चुकी है. ईसाई शादियों में वर-वधू एक दूसरे को किस जरूर करते हैं.
कामसूत्र में भी इसके बारे में बताया गया
किसिंग का उल्लेख कामसूत्र में भी किया गया है बल्कि इसमें स्त्री पुरुष के बीच रोमांस की पूरी केमेस्ट्री में चुंबन के महत्व को विस्तार से समझाया गया है. इसमें ये भी बताया गया है कि अगर आप किसी को पहली बार किस करना चाहते हैं तो कब और कैसे करें औऱ कैसे ये समझें कि ये करना आपके लिए ठीक रहेगा. कहा जाता है कि यूरोप में 17वीं सदी का दौर चुंबन का दौर था. इसे द ग्रेट एज ऑफ किसिंग कहा गया. भारत में जहां चुंबन और रोमांस पर वर्जनाएं और नैतिकता के नए नियम हावी हो रहे थे वहीं यूरोप में इसका सार्वजनिक प्रदर्शन होने लगा था.
दुनिया का सबसे प्रसिद्ध किसिंग फोटोग्राफ
वैसे दुनिया के सबसे प्रसिद्ध किसिंग फोटोग्राफ की भी अपनी कहानी है. ये फोटोग्राफ दुनिया के सर्वकालिक महान फोटोग्राफ के तौर पर शुमार किया जा चुका है. दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था. जहाजी जार्ज मेंडोंसा अपनी प्रेमिका के साथ मूवी देखने गया था.
आधी मूवी में उसे सूचना मिली कि जापान ने समर्पण कर दिया है और विश्व युद्ध खत्म हो चुका है. बाहर सड़कों पर भीड़ जमा थी. खुशियों का एजहार कर रही थी. मेंडोसा को तभी एक नर्स वहां सड़क पर दिखी, उसने उसे पकड़कर प्रगाढ़ चुंबन दिया.
फोटोग्राफर ने इसे तुरंत कैच कर लिया. मेंडोसा की प्रेमिका भी वहीं थी. बाद में कहा गया कि मेंडोसा ने युद्ध के दौरान नर्सों के काम के प्रति आभार जताने के लिए ऐसा किया था.
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Tags: Love, Love Story, Lover
FIRST PUBLISHED : May 22, 2023, 16:59 IST








