कर्नाटक फतह के बाद राजस्‍थान पर फोकस, पायलट को बड़ी जिम्‍मेदारी देने की तैयारी, क्‍या करेंगे गहलोत?

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जयपुर. राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर से सचिन पायलट बनाम अशोक गहलोत विवाद को सुलझाने की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं. इस विवाद को सुलझाने के लिए गुरुवार को दिल्ली में पार्टी नेताओं की बैठक होगी. बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने पायलट को मनाने के लिए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देने की भी तैयारी कर रही है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक इसके तहत सचिन पायलट को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष या फिर चुनाव अभियान कमेटी का अध्यक्ष बनाने पर विचार किया जा रहा है.

दरअसल, सचिन पायलट ने अपनी मांगों को लेकर 31 मई  की डेडलाइन दे रखी है. इसके साथ ही उन्होंने 1 जून से आंदोलन की भी चेतावनी दे रखी है. पार्टी की कोशिश है कि पायलट की ओर से दी गई डेडलाइन से पहले उन्हें मना लिया जाए. इसके लिए पायलट बनाम गहलोत विवाद का किसी नए फॉर्मूले से निपटारा किया जाए. बताया जा रहा है कि अशोक गहलोत अभी भी पायलट के साथ सत्ता और संगठन में बराबरी की भागीदारी के लिए तैयार नहीं हैं.

26 मई को होगी औपचारिक बैठक
गहलोत बनाम पायलट विवाद को लेकर पार्टी की औपचारिक बैठक 26 मई को होगी. यह बैठक पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे लेंगे. उसमें गहलोत और पायलट के अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा तथा प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा को भी बुलाया गया है. लेकिन उससे पहले 25 तारीख को एक अनौपचारिक बैठक भी होगी. अगर बातचीत आगे बढ़ी तो फिर 26 मई की बैठक में प्रदेश कांग्रेस के कुछ और सीनियर नेताओं को बुलाया जा सकता है.

राजस्थान में पार्टी की वापसी नामुमकिन हो जाएगी
कांग्रेस हाईकमान की कोशिश है कि राजस्थान में पांच माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह मसला निपटा लिया जाना चाहिए. पार्टी राजस्थान में पायलट की ताकत को देखते हुए अब सुलह के प्रयासों में तेजी ला रही है. पार्टी को आशंका है कि यदि सचिन पायलट ने कांग्रेस छोड़ दी तो राजस्थान में उसकी वापसी नामुमकिन हो जाएगी. इसका असर केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी पड़ सकता है.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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