Sudan Unrest: पूर्वी अफ्रीकी देश सूडान में बीते पांच सप्ताह से संघर्ष चल रहा है. दरअसल, 15 अप्रैल को सूडान के सशस्त्र बलों (SAF) और प्रतिद्वंद्वी त्वरित बलों (RSF) के बीच युद्ध भड़क गया था. तब से दोनों पक्षों में लगातार खूनी संघर्ष जारी था. इस दौरान भारत सरकार ने बड़ी संख्या में भारतीयों को वहां से सुरक्षित निकाले. सोमवार यानी 22 मई 2023 की शाम को दोनों पक्षों की सहमति से 7 दिन का संघर्षविराम शुरू हुआ. हालांकि, इसके शुरू होते ही हवाई हमले और झड़पें फिर शुरू हो गईं. सूडान में लगातार जारी इस संघर्ष ने कोला और पेप्सिको समेत दुनियाभर की तमाम सॉफ्ट ड्रिंक कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है.
सॉफ्ट ड्रिंक कंपनियों के साथ ही कई दवा और कॉस्मेटिक कंपनियां भी सूडान में जारी युद्ध से परेशान हैं. जानते हैं कि आखिर सूडान में इन कंपनियों का ऐसा कौन सा हित है या इन्हें वहां से ऐसा क्या मिलता है, जिसके जोखिम में पड़ने से ये परेशान हो गई हैं. दरअसल, कोल्ड ड्रिंक, कॉस्मेटिक और कुछ दवाइयों में एक खास तरह की चीज मिलाई जाती है, जिसकी 80 फीसदी आपूर्ति सूडान से ही होती है. अगर ये खास चीज कोल्ड ड्रिंक्स में ना मिलाई जाए तो हमारे सॉफ्ट ड्रिंक का स्वाद वैसा नहीं होगा, जैसा हमें अभी लगता है.
सूडान में मिलता है अकेसिया ट्री
सूडान के जंगलों में एक ऐसा पेड़ मिलता है, जो यहीं पर ज्यादा होता है. इस अकेसिया ट्री नाम के पेड़ से भारत में पाए जाने वाले बबूल से निकलने वाले गोंद जैसा गम निकलता है. यही गम बेहद कीमती और दुर्लभ है. सामान्य गोंद से कई फायदे होते हैं. वहीं, अकेसिया ट्री से मिलने वाले गोंद का इस्तेमाल सॉफ्ट ड्रिंक, सोडा, कैंडीज, मेकअप प्रोडक्ट्स और दवाइयां बनाने में किया जाता है. दुनियाभर में इस खास गोंद की 80 फीसदी सप्लाई अकेला सूडान ही करता है.
सूडान में पाए जाने वाले अकेसिया ट्री से मिलने वाले गोंद का इस्तेमाल सॉफ्ट ड्रिंक, सोडा, कैंडीज समेत कई उत्पादों में किया जाता है.
ये ट्री बढ़ाता है मिट्टी की उर्वरता
सूडान की सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच छिड़ी जंग के कारण दुनिया की बड़ी कोल्ड ड्रिंक कंपनियों को इस गोंद की आपूर्ति नहीं मिल पा रही है. इस गोंद का इस्तेमाल च्युंगम बनाने में भी होता है. अकेसिया ट्री मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाता है. इससे फसल का उत्पादन बढ़ सकता है. किसानों को अकेसिया ट्री से गोंद इकट्ठा करने के लिए कड़ी धूप में जाना पड़ता है. सरकार के नियंत्रण वाले 30 किमी दायरे में फैले जंगलों में इस खास चीज को इकट्ठा करना आसान नहीं होता है.
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तनाव में साफ्ट ड्रिंक कंपनियां
सूडान के लोग मुश्किल से गोंद जुटाकर सिर्फ पेट भरने लायक आमदनी ही जुटा पाते हैं. हालांकि, कुछ लोग अलग से अकेसिया ट्री को उगाते हैं. सूडान के हालात अगर लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो दुनिया की कई सॉफ्ट ड्रिंक कपंनियों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी. लिहाजा कोका कोला और पेप्सिको जैसी कंपनियों ने गम अरेबिक को जमा करके रखना शुरू कर दिया है. गम अरेबिक एक प्राकृतिक गोंद होता है जो अकेसिया ट्री से ही निकलता है. इस गोंद को गम सूडानी, गम अकेसिया, सेनेगल गम भी कहा जाता है.
कोका कोला और पेप्सिको जैसी ज्यादातर सॉफ्ट ड्रिंक बनाने वाली कंपनियों ने गम अरेबिक जमा करना शुरू कर दिया है.
पानी में घुल जाता है ये गोंद
अकेसिया ट्री से मिलने वाला गम अरेबिक इरीट्रिया, चाड, नाइजर, नाइजीरिया, माली, सेनेगल में भी पैदा होता है. हालांकि, इसकी पैदावार सबसे ज्यादा सूडान के जंगलों में ही होती है. ये गोंद पानी में पूरी तरह से घुलनशील होता है. इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल फूड इंडस्ट्री में ही होता है. इसे कोई भी व्यक्ति खा सकता है. इसके अलावा इस खास गोंद का इस्तेमाल प्रिंटिंग, पेंटिंग, ग्लू, कॉस्मेटिक्स इंडस्ट्री में खूब किया जाता है. यही नहीं, कपड़ा उद्योग में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है.
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FIRST PUBLISHED : May 23, 2023, 13:55 IST








