Religious Story: बिलासपुर में है विश्व का इकलौता कौशल्या माता मंदिर, भगवान राम की माता का यहीं हुआ था जन्म

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सौरभ तिवारी/बिलासपुर. छत्तीसगढ़ में चंदखुरी को भगवान श्री राम का ननिहाल कहा जाता है. यहां कौशल्या माता का एक प्राचीन मंदिर है, जिसे 10वीं शताब्दी में बनाया गया था. माता कौशल्या का यह धाम अब और भी सुंदर और भव्य हो चुका है. राजधानी रायपुर के करीब बना माता कौशल्या के प्राचीन मंदिर की खूबसूरती देखने लायक है. यह मंदिर तालाब के बीचों बीच बना हुआ है और आस पास जहां तक देखें वहां खूबसूरत दृश्य ही दिखाई देता है.

मंदिर के प्रांगण में एक गार्डन भी बनाया गया है. वहीं तालाब में समुद्र मंथन के दृश्य को दर्शाया गया है. मंदिर परिसर में हनुमान जी और नंदी महाराज शिवजी की प्रतिमाएं भी हैं. प्रभु श्री राम की भव्य प्रतिमा भी है, जिसे देख मन आह्लादित हो उठता है.

राजधानी से 17km की दूरी पर है मंदिर

कौशल्या माता मंदिर में मौजूद माता की प्रतिमा भी अद्भुत है. यहां माता श्री राम को गोद में लिए हुए हैं. यह पूरे देश में कौशल्या माता का इकलौता मंदिर है. मंदिर परिसर के बाहर छोटे-मोटे ठेले और दुकान भी लगते हैं, जहां से श्रद्धालु भोग, प्रसाद, चढ़ावा का सामान ले सकते हैं. यहां आपको चाट, गुपचुप और खान पान की छोटी दुकानें भी मिल जाएंगी. यह मंदिर राजधानी रायपुर से 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

राजा भानुमंत ने बेटी कौशल्या दिए थे दस हजार गांव

बताया जाता है कि महाकौशल के राजा भानुमंत की बेटी कौशल्या का विवाह अयोध्या के राजा दशरथ से हुआ था. विवाह में भेंटस्वरूप राजा भानुमंत ने बेटी कौशल्या को दस हजार गांव दिए थे. इसमें उनका जन्म स्थान चंद्रपुरी भी शामिल था. चंदखुरी का ही प्राचीन नाम चंद्रपुरी था. जिस तरह अपनी जन्मभूमि से सभी को लगाव होता है ठीक उसी तरह माता कौशल्या को भी चंद्रपुर विशेष प्रिय था. राजा दशरथ से विवाह के बाद माता कौशल्या ने तेजस्वी और यशस्वी पुत्र राम को जन्म दिया.

आज भी यहां विराजमान हैं माता कौशल्या 

मान्यता के अनुसार, सोमवंशी राजाओं द्वारा बनाई गई मूर्ति आज भी चंदखुरी के मंदिर में मौजूद है. मंदिर में भगवान श्री राम को गोद में लिए हुए माता कौशल्या की मूर्ति स्थापित है. भगवान राम के वनवास से आने के बाद उनका राज्याभिषेक किया गया. उसके बाद तीनों माताएं कौशल्या, सुमित्रा और कैकयी तपस्या के लिए चंदखुरी ही पहुंचीं थीं. तीनों माताएं तालाब के बीच विराजित हो गईं. कहा जाता है कि, जब इस तालाब के जल का उपयोग लोग गलत कामों के लिए करने लगे तो माता सुमित्रा और कैकयी रूठकर दूसरी जगह चली गईं. लेकिन, माता कौशल्या आज भी यहां विराजमान हैं.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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