धनबाद में लगे एक्सपो डिजनीलैंड मेले में बांस के उत्पाद खींच रहे लोगों का ध्यान, जानें खासियत

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मो. इकराम/धनबाद. धनबाद के जिला परिषद मैदान में 10 मई से एक्सपो डिजनीलैंड मेला आयोजित हो रहा है. इसमें लगे विभिन्न उत्पादों के स्टॉल्स में एक स्टाल बांस से तैयार विभिन्न तरह के उत्पादों का भी है. यह स्टॉल लोगों का ध्यान खींच रहा है. असम से आए शिल्पकार अब्दुल अली बांस और बेंत से बने उत्पादों को यहां प्रदर्शित कर रहे हैं. इन उत्पादों को बनाकर एक तरफ जहां प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल के नारे को चरितार्थ कर रहे हैं, वहीं, दूसरी तरफ प्लास्टिक से दूर रहकर इन उत्पादों के माध्यम से पर्यावरण बचाने का संदेश भी दे रहे हैं.

स्टॉल पर उपलब्ध कई तरह की आइटम

स्टॉल में बांस से बनी छोटी-बड़ी लेम्प, हैंगिंग लेम्प, टेबुल लेम्प, कलर लेम्प, गृह सज्जा, बांस से बनी भगवान गणेश की आकृति, गुलदस्ता, ट्रे, डायनिंग टेबल पर फलों आदि रखने के लिए टोकरी, लेटर बॉक्स, की रिंग आदि 40 से 50 तरह के आइटम मौजूद हैं. 100 से 2500 रुपए तक की रेंज में है. 50 से 400 रुपए तक के कई और भी उत्पाद हैं. साथ ही बांस और बेंत से तैयार आरामदायक कुर्सी इनके स्टॉल का मुख्य आकर्षण हैं. इसकी कीमत 2500 रुपए है.

एक दिन में तैयार होती है एक कुर्सी

शिल्पकार ने बताया कि आरामदायक कुर्सी बनाने में करीब दो से तीन बांस का इस्तेमाल होता है. बांस के छोटे-छोटे टुकड़े को बेंत से जोड़ा जाता है. एक दिन में छोटे-छोटे 10 उत्पाद तैयार कर लिए जाते हैं, जबकि एक आरामदायक कुर्सी तैयार करने में पूरा एक दिन का समय लगता है. ये प्रोडक्ट कई सालों तक सही अवस्था में रहते हैं. उन्होंने बताया कि उत्पादों में रंगों से डिजाइन दिया जाता है, जिसकी खूबी है कि पानी लगने पर भी रंग नहीं जाता है.

आज भी बांस से बने उत्पादों का क्रेज बरकरार

शिल्पकार ने बताया कि असम वन संसाधनों में समृद्ध है और इसके अधिकतर वनों में विभिन्न प्रजातियों के बांस और बेंत प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. बांस एक बहुउपयोगी कच्ची सामग्री है और यह असम की जीवनशैली और अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न हिस्सा है. मेला घूमने आए धनबाद के रहने वाले डॉ. नीरज कुमार ने बताया कि बांस से बने उत्पाद पुरानी परम्परा और सभ्यता की याद दिलाते हैं. शिल्पकारों ने अपनी कला से इन उत्पादों को आज के वर्तमान परिवेश के साथ ढाला है. यह हमारी संस्कृति को भी दर्शाता है. अच्छी बात है कि आज भी इन उत्पादों का क्रेज बरकरार है और यह रोजगार से भी जोड़ता है. मेला रोजाना 4 से लेकर रात्रि 9:30 बजे तक संचालित होता है.

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Author: Up Head Line

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