महाभारत से पहले युधिष्ठिर नहीं जानते थे सच, पता चलते ही जीत पर नहीं हुए खुश, अपनी मां कुंती को ठहराया दोषी

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हाइलाइट्स

महाभारत का युद्ध कौरवों और पांडवों के बीच हुआ था.
धर्म अधर्म पर ये युद्ध 18 दिनों तक लड़ा गया.

Interesting Facts of Mahabharata : हिंदू धर्म में प्रचलित धार्मिक ग्रंथों में एक महाभारत भी है, जिसके बारे में हम सभी जानते हैं. महाभारत कौरवों और पांडवों के बीच धर्म-अधर्म को लेकर 18 दिनों तक हुए युद्ध पर आधारित है. इस दौरान कई ऐसी घटनाएं घटित हुईं, जो आज तक लोगों को उपदेश, संदेश और शिक्षा दे रही है. हालांकि, इस युद्ध के दौरान धर्मराज युधिष्ठिर और सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन के अलावा, अनेक योद्धाओं ने कई तरह का छल कपट का किया था. आज हमें भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा बता रहे हैं कि युधिष्ठिर ने अपनी मां कुंती को क्या श्राप दिया था और कुंती ने युधिष्ठिर से क्या छुपाया था?

युधिष्ठिर कर रहे थे विलाप

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद जब परिजनों और रिश्तेदारों का तर्पण किया गया. उसके बाद पांडव पूरे 1 महीने गंगा के तट पर ही रुके थे. इस दौरान धर्मराज युधिष्ठिर को कई महान ऋषि मुनि और संत सांत्वना देने आ रहे थे. इसी क्रम में देव ऋषि नारद का आना हुआ. उन्होंने युधिष्ठिर से पूछा कि क्या आप पापी दुर्योधन को हराने के बाद खुश नहीं हैं?

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युधिष्ठिर का जवाब

युधिष्ठिर में देव ऋषि नारद को भारी मन से जवाब देते हुए कहा कि भले ही मैंने भगवान कृष्ण की कृपा, ब्राह्मणों के आशीर्वाद और भीम अर्जुन की शक्ति से इस युद्ध पर विजय प्राप्त कर ली, लेकिन फिर भी मुझे यह सच जानकर बेहद गहरा सदमा लगा है कि मैंने लालच वश इतनी बड़ी संख्या में अपनों को ही मार दिया. अभिमन्यु के निधन से जो पीड़ा द्रौपदि को उत्पन्न हुई है, इसे देखकर मैं इस जीत को अपनी जीत नहीं मानता. युधिष्ठिर कहते हैं, जब इन सभी योद्धाओं का वध कर दिया गया, उसके बाद मुझे पता चला कि कर्ण मेरे भाई थे. वे सूर्य देव और माता कुंती के पुत्र थे. दुनिया के सभी लोग ये मानते थे कि वे राधा के पुत्र हैं, लेकिन सच तो ये है कि वे मेरी मां के सबसे बड़े पुत्र थे. इस बात से मैं, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव हम सभी अनजान थे, परंतु कर्ण ये जानते थे कि हम सभी उनके छोटे भाई हैं.

कर्ण के दुर्योधन से थे घनिष्ठ संबंध

भगवान कृष्ण और माता कुंती ने कर्ण को ये जानकारी दी थी कि हम उनके छोटे भाई हैं परंतु दुर्योधन के साथ घनिष्ठता के कारण वे हमारे साथ इस युद्ध में नहीं आ सके. उन्होंने हमारा वध नहीं करने का वचन दिया था. आगे युधिष्ठिर कहते हैं कि यदि मेरे पास अर्जुन और कर्ण दोनों भाई होते तो मैं इस दुनिया पर भी विजय पा सकता था. इतना कहकर युधिष्ठिर भावुक हो उठे. तभी वहां माता कुंती आ जाती हैं और अपने पुत्र से शोक नहीं करने के लिए कहती हैं. आगे वे बताती हैं कि उन्होंने कर्ण को आप सभी के बारे में बताने की कोशिश की थी. सूर्यदेव मेंम ने भी उनसे बात करने का प्रयास किया था परंतु दुर्योधन से घनिष्ठ मित्रता होने के कारण कर्ण ने उनका साथ नहीं छोड़ा.

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माता कुंती से नाराज हो गए युधिष्ठिर

जब कुंती पुत्र युधिष्ठिर से विलाप ना करने और शांत होने के लिए आग्रह कर रही थीं तो धर्मराज युधिष्ठिर शांत ना होते हुए और अधिक क्रोधित हो उठे. उन्होंने अपनी मां से इस बात की नाराजगी जाहिर की, कि इस सच को छुपा कर कि कर्ण हमारे बड़े भाई थे. आपकी वजह से मैं अपने ही भाई का हत्यारा बन गया. इस सच को जानने के बाद युधिष्ठिर अपनी मां से नाराज हो गए थे.

Tags: Dharma Aastha, Mahabharat, Mahabharata, Religion

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Author: Up Head Line

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