
मो. महमूद आलम/नालंदा. बिहार सरकार भले ही शिक्षा व्यवस्था और उसके इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन जमीन हकीकत बिल्कुल अलग है. ताजा मामला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह प्रखंड हरनौत के प्राथमिक विद्यालय महवाचक का है. यहां 5 वर्षों से एक भी बच्चे ने नामांकन नहीं कराया है. संभवत: यह जिला ही नहीं राज्य का एकमात्र स्कूल होगा, जहां एक भी बच्चे का नामांकन नहीं हुआ है. यहां मध्याह्न भोजन, साइकिल, स्कूल ड्रेस, छात्रवृत्ति सहित तमाम योजनाओं के माध्यम से बच्चों को विद्यालय की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया गया, लेकिन यह नाकाफी साबित हुआ.
5 वर्ष से सरकारी विद्यालय में एक भी बच्चे का नामांकन नहीं हो पाना पूरी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है. पहले केंद्र सरकार के यू डायस पोर्टल पर बच्चों की संख्या की इंट्री कर दी जाती थी ताकि बजट में विद्यालय को सहायता मिल सके. लेकिन अब यू डायस प्लस पर बच्चों की पूरी जानकारी देनी होगी. इस कारण नामांकन शून्य दिखाना होगा.
स्कूल के प्रभारी प्रधानाचार्य संजय कुमार बताते हैं कि स्कूल की स्थापना 1980 में की गई थी. यहां पहले बच्चों का अधिकतम संख्या 50 से 60 रही है. इसमें 30-40 बच्चे स्कूल में उपस्थित रहते थे. वर्ष 2012-13 तक नामांकन ठीक-ठाक था. उस समय गांव में सड़क नहीं थी. वर्ष 2014 में गांव सड़क मार्ग से जुड़ गया. इससे स्कूल में बच्चों की संख्या कम होने लगी. वर्ष 2018 आते-आते यह संख्या शून्य हो गई. यही स्थिति अब तक बनी हुई है. गांव में कई बार लोगों को इसके प्रति जागरूक किया गया. बावजूद 5 वर्ष से नामांकन नहीं हुआ है. जबकि इस गांव के बच्चे दूसरे गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ाई करने जाते हैं. यहां एक समाज के लोग ज़्यादा रहते हैं और आय से मजबूत हैं.
इस गांव में 500 वोटर हैं. क़रीब 1000 की आबादी है. स्कूल का भवन जर्जर होने के कारण बच्चे नहीं नामांकन कराते हैं. सबसे ज्यादा दिक्कत है कि इस स्कूल में योग्य शिक्षक नहीं हैं. मध्याह्न भोजन जो आता है उसे ये लोग हड़प जाते हैं. बच्चों को सिर्फ़ माड़ भात खिलाते हैं. यह 73 परिवारों का गांव है. अधिकांश लोग नौकरी पेशा हैं. कुछ व्यापारी भी हैं. कुछ लोग बच्चों की पढ़ाई के लिए बाहर रहते हैं. इस वजह से गांव में बूढ़े-बुजुर्ग ही ज्यादा दिखते हैं. महवाचक राजस्व गांव छतियाना का टोला है.
ज़िला शिक्षा पदाधिकारी केशव प्रसाद ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए विद्यालय में बच्चों का नामांकन कराने का प्रयास किया जा रहा है. विद्यालय में बच्चा नहीं होने के कारण वहां पदस्थापित शिक्षकों को दूसरे स्कूल में भेज दिया गया है. विशेष अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है.
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FIRST PUBLISHED : May 19, 2023, 14:10 IST








