
हाइलाइट्स
अंतिम वक्त में सोनिया-खड़गे की जोड़ी ने कर्नाटक में चल रहे नाटक पर पर्दा गिराया.
इस पूरी प्रक्रिया में जिस शख्स की अहम भूमिका रही वह थीं पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी.
नई दिल्ली: कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने आशातीत जीत हासिल की. उसके बाद बारी आई मुख्यमंत्री कौन बनेगा? सिद्धारमैया या शिवकुमार. कर्नाटक में कुछ दिनों तक चले इस नाटक का पटाक्षेप आखिर हो ही गया. डीके शिवकुमार ने समझौता कर ही लिया. इस पूरी प्रक्रिया में जिस शख्स की अहम भूमिका रही वह थीं सोनिया गांधी. पिछले साल जब सोनिया गांधी ने कांग्रेस पार्टी के प्रभार से खुद को मुक्त किया और अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंपी तो यह उनके लिए राहत की सांस लेने का वक्त था. लेकिन पार्टी के तौर तरीकों और जिस तरह से वह काम करती है उसे देखकर सोनिया को यह पता था कि भले ही उन्होंने पद छोड़ दिया है लेकिन उनकी मौजूदगी अभी भी जरूरी है.
सोनिया-खड़गे की जोड़ी ने नाटक पर आखिर पर्दा गिराया
चार दिन तक चले कर्नाटक संकट से उबरने के लिए सोनिया और खड़गे को साथ आना पड़ा और इससे एक बार फिर यह साफ हो गया कि अगले साल होने वाला लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सोनिया-खड़गे को एक जोड़ी की तरह ही काम करना होगा. तमाम मीडिया संस्थान जब यह अनुमान लगा रहे थे कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा और ऐसा लग रहा था कि कहीं कांग्रेस में फिर से भीतरी कलेश ना पैदा हो जाए. ऐसे में अंतिम वक्त में सोनिया-खड़गे की जोड़ी ने इस नाटक पर से पर्दा गिराया और सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को उप-मुख्यमंत्री घोषित कर दिया.
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कुछ बोला तो होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
दरअसल इस कहानी में अहम मोड़ तब आया जब डीके शिवकुमार के समर्थकों ने मीडिया के सामने मांग रखी की शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाए. यह तब हुआ जब डीके राहुल गांधी के साथ बैठक में थे और गांधी ने उनसे कह दिया था कि इंसाफ किया जाएगा. मामला बिगड़ते देख कांग्रेस अध्यक्ष ने लगभग डपटते हुए कहा कि यह मामला जल्दी से जल्दी सुलझाने की जरूरत है. रणदीप सुरजेवाला को एक बयान जारी करने के लिए कहा गया. जिसमें यह कहा गया था कि मुख्यमंत्री के पद को लेकर जो नेता सार्वजनिक तौर पर कोई बयान देगा उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
दोनों नेताओं को अलग अलग समझाया
इसके बाद खड़गे ने सोनिया गांधी से बात की और केसी वेणुगोपाल व रणदीप सुरजेवाला से कहा कि कर्नाटक के दोनों नेताओं से अलग-अलग बात करें और उन्हें मामले की गंभीरता समझाएं. कांग्रेस अध्यक्ष और सोनिया गांधी का संदेश साफ था- सिद्धारमैया मुख्यमंत्री होंगे वहीं डीके शिवकुमार उपमुख्यमंत्री के साथ साथ लोकसभा चुनाव तक राज्य अध्यक्ष का पद संभालेंगे. इस तरह शिवकुमार को राज्य प्रमुख बनाकर एक अहम फैसला लिया गया. क्योंकि चुनाव वर्ष में जिसके हाथ में पार्टी की कमान हैं वही टिकट वितरित करता है. यानी उसके पास ताकत होगी.
वहीं रोटेशन सिस्टम के मामले में पार्टी ने सार्वजनिक नहीं होने का फैसला दो वजहों से किय. एक, इससे सिद्धारमैया कमज़ोर नज़र आएंगे. दूसरा दोनों नेताओं के बीच तनाव बढ़ेगा.
फिर से चला सोनिया गांधी का जादू
सूत्रों का कहना है कि यह विचार सोनिया गांधी का था जिससे खड़गे सहमत थे. सोनिया राजस्थान और छत्तीसगढ़ के बाद इस बात को जानती थी कि रोटेशन या उपमुख्यमंत्री का पद न्याय की गारंटी नहीं हो सकता है. इसलिए उन्होंने डीके शिवकुमार को फोन किया और यह आश्वासन दिया कि वह छत्तीसगढ़ या राजस्थान में जो हुआ उसे दोबारा नहीं होने देंगी. डीके सोनिया को इनकार नहीं कर सके और समझौते के लिए राजी हो गए. सोनिया को अब अपने रिटायरमेंट के बारे में दोबारा सोचने की जरूरत है और खड़गे को भी उनके साथ की जरूरत होगी.
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Tags: DK Shivakumar, Karnataka, Karnataka assembly election, Mallikarjun kharge, Siddaramaiah, Sonia Gandhi
FIRST PUBLISHED : May 19, 2023, 10:53 IST









