
लखनऊ. 2002 में लखीमपुर खीरी के प्रभात गुप्ता हत्याकांड मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के खिलाफ सरकार की अपील पर फैसला सुनाएगी. मामले में 21 फरवरी को सुनवाई के बाद हाईकोर्ट लखनऊ बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा था. हालांकि 10 नवंबर 2022 को भी कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था, लेकिन सुनवाई करने वाली बेंच ने कुछ बिंदुओं को और स्पष्ट करने के लिए दोबारा सुनवाई की थी.
इस मामले में सरकार की तरफ से दलील दी गई कि पंचायत चुनाव को लेकर टेनी का छात्र नेता प्रभात से विवाद चल रहा था. सरकार की तरफ से आरोप लगाया गया कि प्रभात को टेनी और दूसरे आरोपी सुभाष मामा ने भी गोली मारी थी. घटना के चश्मदीद गवाह भी थे, जिनकी गवाही को ट्रायल कोर्ट ने नजरअंदाज किया. इस पर बचाव पक्ष की दलील थी कि कथित चश्मदीद की गवाही को ट्रायल कोर्ट ने भरोसे के लायक नहीं माना था, क्योंकि जहां घटना हुई चश्मदीद वहां पर एक दुकान का कर्मचारी बताया गया. जबकि घटना के दिन वह दुकान खुली ही नहीं थी. चश्मदीद की मौके पर मौजूदगी को संदिग्ध माना गया था. बचाव पक्ष ने कहा कि अजय मिश्र टेनी को बरी करने का ट्रॉयल कोर्ट का फैसला उचित था.
वर्ष 2000 में लखीमपुर खीरी में प्रभात गुप्ता की सरे बाजार उस वक्त गोली मारकर हत्या हुई थी, जब वे घर लौट रहे थे. उस वक्त प्रभात समाजवादी पार्टी की यूथ विंग का सदस्य था, जबकि टेनी बीजेपी से जुड़े थे. एफआईआर में अजय मिश्र टेनी समेत चार लोगों को आरोपी बनाया गया था. ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के अभाव में 2004 में टेनी को बरी कर दिया था. ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ 2004 में ही राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी.









