मधुमक्खियों को भा रहा गया का मौसम, कई जिलों से बाक्स लेकर पहुंच रहे मधुमक्खी पालक

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कुंदन कुमार/गया. मधुमक्खी पालन एक ऐसा व्यवसाय है, जिससे किसानों को दोहरा मुनाफा हो सकता है. इससे जहां किसानों की फसल की उपज बढ़ जाती है. वहीं शहद भी मिल जाता है. राज्य सरकार मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी देती है.

मधुमक्खी पालन के फायदे को देखते हुए राज्य भर में बड़ी संख्या में किसान अब इससे जुड़ गए हैं. बिहार के किसानो को मधुमक्खी पालन में फायदा तो है लेकिन मेहनत भी अधिक करना होता है. मधुमक्खियों को जीवित रखने के लिए माइग्रेशन करना पड़ता है.

बेगूसराय से 250 बॉक्स लेकर पहुंचे गया
दरअसल, बिहार में मधुमक्खी पालन के लिए साल भर उचित जलवायु नहीं मिलती है. जिस कारण मधुमक्खी पालक अपने मधुमक्खियों को जीवित रखने और शहद उत्पादन के लिए इधर-उधर जाते रहते हैं. बिहार में ठंड के मौसम में मधुमक्खी पालन के लिए मौसम अनुकूल माना गया है, लेकिन गर्मी के दिनों में मधुमक्खी पालकों की परेशानी बढ़ जाती है. अभी गर्मी का मौसम चल रहा है.

ऐसे में बिहार के बेगूसराय के रहने वाले मधुमक्खी पालक अविनाश तकरीबन 250 मधुमक्खी बॉक्स को लेकर गया पहुंचे हुए हैं. कहा जा रहा है कि गर्मी के दिनों में बेगूसराय तथा आसपास के क्षेत्र में उस तरह की जलवायु नहीं मिल रही है. जिस कारण अपने मधुमक्खी बाक्स को लेकर गया पहुंच गए हैं.

मधुमक्खियों को जीवित रखने के लिए करते हैं माइग्रेशन
किसानों के लिए गर्मी में मधुमक्खी पालन घाटे का सौदा बन गया है. फूलों की कमी के कारण मधु मक्खियां शहद बनाने में असफल हो रही हैं. मक्खियां जीवित रहे इसके लिए चीनी का घोल खिलाना पड़ रहा है.

यही वजह है कि किसान अपने मधुमक्खियों को जीवित रखने के लिए माइग्रेशन करते हैं. बेहतर जलवायु वाले क्षेत्र में जाते हैं. गया में ताड़ के पेड़ की संख्या अधिक है. जिस कारण मधुमक्खियों को आसानी से यहां पाॅलेन मिल जाता है. यही वजह है कि बेगूसराय के मधुमक्खीपालक अपने मधुमक्खी बाक्स को लेकर गया पहुंच गये हैं.

इस वजह से पहली बार आए गया
मधुमक्खीपालक अविनाश कुमार बताते हैं गर्मी के मौसम मे तीन चार महीने के लिए अपने बाक्स को लेकर इधर उधर चले जाते है. पहली बार गया आए हैं, क्योंकि यहां ताड़ के पेड़ अधिक है. उससे अधिक मात्रा में पाॅलेन मिल जाता है. जिस कारण मधुमक्खी जीवित रहते हैं. इस मौसम मे फूलों की कमी रहती है जिस कारण मधुमक्खियों को जीवित रखने के लिए इधर-उधर जाना पड़ता है. इन्हें चीनी का घोल दिया जाता है. इन्होंने बताया इस व्यवसाय में दोगुना मुनाफा है. सरकार के तरफ से भी इसे करने के लिए सहयोग दिया जाता है.

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FIRST PUBLISHED : May 18, 2023, 20:06 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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