
हिना आजमी/ देहरादून. राजधानी देहरादून की कचहरी स्थित एक पुराना कुआं अपने भीतर कई रहस्य छिपाए हुए हैं. ब्रिटिशकाल के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों को यहां फांसी दी जाती थी. आज भी इसमें से अजीबो-गरीब आवाजें सुनाई देती हैं. बताया जाता है कि इस कुएं में डाकू सुल्ताना की सुरंग का दरवाजा है. यह सुरंग डोईवाला तक जाती है.
एफ जे शोरी ने करवाया था कुंए का निर्माण
साल 1823 में एफ जे शोरी ने इस कुएं का निर्माण करवाया था, इसलिए इसे शोरीज वेल या शोरी का कुआं कहा जाता है. इस कुएं का निर्माण लाहौरी ईंटों से करवाया गया था. वहीं, उस जमाने में सीमेंट नहीं होता था तो इसे उड़द की दाल के लेप से बनवाया गया था.
अंग्रेजों के समय पर बनाए गए इस कुएं से आजादी के दीवानों की कुर्बानियों की कहानी भी जुड़ी हैं. अंग्रेज स्वतंत्रता सेनानियों को कुएं पर फांसी पर लटका देते थे, और उनके शवों को कुएं में ही फेंक दिया करते थे. जब 1945 में दंगे हुए उस समय इस कुएं में कई शव फेंके गए. कुछ लोगों का कहना है कि इस कुएं से कभी-कभी अजीबो गरीब आवाजें आती हैं.
स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानी की निशानी है कुआं
राज्य आंदोलनकारी नवनीत गुसाईं ने बताया कि यह कुआं देशभक्ति और स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानी की निशानी है, लेकिन आज यह एक जर्जर हालात में पड़ा है. सरकार की तरफ से इसको ठीक करके रखा जाता तो यह भी ऐतिहासिक पर्यटन स्थल की तरह देहरादून की धरोहर बनता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सुभाष देवलिया का कहना है कि यह कुआं काफी सालों से खंडर बना पड़ा है.
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FIRST PUBLISHED : May 18, 2023, 15:42 IST








