
हाइलाइट्स
किसी बुरी घटना या किसी व्यक्ति, दोस्त को खो देने के कारण बच्चे ट्रॉमा से ग्रस्त हो सकते हैं.
इस स्थिति में रात में नींद न आना, डरा हुआ महसूस करना आदि संकेत नजर आते हैं.
Signs of Trauma in kids: बच्चों के सामने कोई हादसा या घटना घट जाए तो वे उसे जल्दी भुला नहीं पाते हैं. घर में पैरेंट्स के बीच बहस, लड़ाई-झगड़े होता देखना, कोई दुर्घटना होते देखना, किसी अपने फेवरेट व्यक्ति या बेस्ट फ्रेंड को खोने के कारण उनके मन पर इन बातों का नेगेटिव और गहरा असर पड़ता है. ऐसी बातों को वे अपने अंदर ही दबा कर रखते हैं, जल्दी किसी से शेयर नहीं करते हैं. वे दूसरों से मिलना-जुलना, बात करना कम कर देते हैं. अपने कमरे में अकेले रहने लगते हैं. कुल मिलाकर उनके ऊपर इन हादसों का गहरा असर होता है. वे जल्दी इस ट्रॉमा से खुद को बाहर नहीं निकाल पाते हैं. ऐसे में पैरेंट्स को बच्चे के अंदर आ रहे इन तमाम बदलावों को समझने और इन पर गौर करने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि बच्चे के मानसिक सेहत पर इसका नेगेटिव असर ना हो. बच्चा परेशान है या किसी हादसे के कारण किसी ट्रॉमा में जी रहा है तो आप कुछ संकतों से इसे पहचान सकते हैं.
क्या और कब होता है बच्चों में ट्रॉमा का असर
कन्टिन्यूआकिड्स डॉट कॉम में छपी एक खबर के अनुसार, जब बच्चे 0 से 6 वर्ष की आयु के बीच कोई बुरी घटना या हादसा को अपनी आंखों के सामने होता देखते हैं तो वे चाइल्डहुड ट्रॉमा से ग्रस्त हो सकते हैं. इतनी कम उम्र में बच्चे जल्दी मन की बातों को एक्सप्लेन नहीं कर पाते हैं. यदि पैरेंट्स समय रहते उनके व्यवहार में आ रहे इन बदलावों पर ध्यान ना दें तो ये समस्या बदतर हो सकती है. बच्चा स्ट्रेस, डिप्रेशन का शिकार हो सकता है.
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बच्चों में ट्रॉमा के संकेतों को ऐसे पहचानें
व्यवहार में बदलाव- ट्रॉमा में होने पर बच्चे का शारीरिक, भावनात्मक और सोशल फंक्शनिंग बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है. यदि आपको भी लगता है कि आपका बच्चा किसी से मिलने-जुलने से बचता है, बाहर नहीं जाना चाहता है तो अलर्ट हो जाएं. अपने अपने बच्चे के पल-पल बर्ताव पर गौर करें. उसे मॉनिटर करें और कुछ नेगेटिव सा दिखे तो एक्सपर्ट से जरूर मिलें.
एंजायटी के लक्षण- ट्रॉमा के कारण बच्चों में एंजायटी के लक्षण नजर आ सकते हैं. यह कॉमन समस्या है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, 13 से 18 साल के टीनएज बच्चों में लगभग तीन में से एक बच्चा एंजायटी डिसऑर्डर से ग्रस्त होता है. एंजायटी इन परिस्थितियों के प्रति एक नॉर्मल प्रतिक्रिया होती है. आप अपने बच्चे को एक पॉजिटिव माहौल देकर, उसे अपना केयर, प्यार, सपोर्ट देकर ट्रॉमा के दर्द से बाहर निकाल सकते हैं.
बच्चे को नींद न आए- ट्रॉमा की स्थिति में होने पर कई बार बच्चे रात में जागते रहते हैं. उनके मन और आंखों के सामने वही सब बातें घूमती रहती हैं, जिसकी वजह से वे प्रॉपर नींद नहीं ले पाते हैं. रात में सोते वक्त रोने लगना, अकेले नहीं सोना चाहता है तो इन संकेतों को हल्के में ना लें.
बाहर जाने से कतराना- कई बार बच्चों के मन में ट्रॉमा का इतना गहरा असर होता है कि वे घर से बाहर जाने में भी डरते हैं. ऐसे में किसी से मिलने जाना, खेलने जाना, स्कूल जाना या फिर दोस्तों से ना मिलने का बहाना करने लगते हैं. ये संकेत आपके बच्चे में नजर आएं तो अलर्ट हो जाएं.
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रोते रहना या चिड़चिड़ा महसूस करना- ट्रॉमा से जूझ रहे बच्चों में चिड़चिड़ापन नजर आ सकता है. कई बार बच्चा हर बात पर रोने लगता है. उसे इनसिक्योरिटी महसूस होने लगती है कि कहीं वह अपने पैरेंट्स या घर-परिवार से बिछड़ ना जाए. ऐसी स्थिति में बच्चा नहीं चाहता है कि उसके मम्मी-पापा उसे एक पल के लिए भी छोड़कर कहीं जाएं. यदि बच्चा बहुत रोता है तो गौर करें कि उसके रोने के पैटर्न में किसी बात का डर तो नजर नहीं आ रहा है.
क्या करें पैरेंट्स?
- बच्चे को अकेला ना छोड़ें और बात करते रहें.
- उसे अहसास कराएं कि आप हमेशा उसके पास हैं.
- भावनात्मक सहारा देने की कोशिश करें.
- उसे कहीं ट्रिप पर घुमाने के लिए ले जाएं.
- जिस काम में उसे दिलचस्पी है, वो करने दें.
- ऑफिस जाते हैं तो घर पर कोई उसके साथ जरूर हो.
- एक्सपर्ट या काउंसलर की मदद लें.
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FIRST PUBLISHED : May 18, 2023, 08:32 IST








