
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ गुरुवार को उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाएगी, जिसमें सांडों को वश में करने वाले खेल ‘जल्लीकट्टू’ और बैलगाड़ी दौड़ की अनुमति देने वाले तमिलनाडु तथा महाराष्ट्र के कानूनों को चुनौती दी गई है. ‘जल्लीकट्टू’ को ‘एरुथाझुवुथल’ के रूप में भी जाना जाता है. सांडों को वश में करने वाला यह खेल तमिलनाडु में पोंगल फसल उत्सव अवसर पर खेला जाता है.
उच्चतम न्यायालय ने इन याचिकाओं पर पिछले साल दिसंबर में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. उस दौरान पांच न्यायाधीशों-न्यायमूर्ति के एम जोसेफ, न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस, न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की संविधान पीठ ने तमिलनाडु की ओर से पेश मुकुल रोहतगी सहित वरिष्ठ अधिवक्ताओं और हस्तक्षेपकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले कई अन्य वकीलों की दलीलें सुनीं थीं.
तमिलनाडु सरकार ने उच्चतम न्यायालय में राज्य में सांडों को काबू में करने वाले खेल ‘जल्लीकट्टू’ की अनुमति देने वाले कानून का बचाव करते हुए कहा था कि यह एक ‘गलत धारणा’ है कि खेल या मनोरंजन का सांस्कृतिक मूल्य नहीं हो सकता. तमिलनाडु सरकार ने शीर्ष अदालत में दायर अपनी लिखित दलीलों में कहा कि ‘जल्लीकट्टू’ एक धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहार है, जिसका राज्य के लोगों के लिए ‘धार्मिक महत्व’ है और यह पशु क्रूरता रोकथाम (पीसीए) अधिनियम, 1960 के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करता.
दलीलों के दौरान, न्यायमूर्ति के एम जोसेफ के नेतृत्व वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को तमिलनाडु की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि एक खेल आयोजन एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हो सकता है और ‘जल्लीकट्टू’ में सांडों पर कोई क्रूरता नहीं की जाती. द्विवेदी ने कहा कि यह एक ‘गलत धारणा’ है कि खेल या मनोरंजन का सांस्कृतिक मूल्य नहीं हो सकता.
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Tags: Jallikattu, Supreme Court, Tamil nadu
FIRST PUBLISHED : May 18, 2023, 07:25 IST








