CGPSC Success Story: 4 बार फेल, फिर भी नहीं मानी हार, 5वें प्रयास में बने उप जेल अधीक्षक

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रामकुमार नायक/ महासमुंद. लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती… इसी बात को चरितार्थ करते हुए महासमुंद जिले के सरायपाली निवासी विजय पटेल ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग में पांचवें प्रयास में सफलता हासिल की है. लगातार 4 बार असफल रहने के बावजूद विजय ने कभी हार नहीं मानी और विजयपथ पर लगातार बढ़ते रहे. पांचवें प्रयास में 106 रैंक लाकर उप जेल अधीक्षक के पद पर चयन हुए हैं. विजय के परिवार में प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों प्रकार के लोग हैं, लेकिन विजय ने प्रशासनिक अधिकारी बनने की ठानी और लगातार कड़ी मेहनत के बाद सफलता अर्जित की है.

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग में सफलता हासिल करने वाले विजय पटेल ने बताया कि मैंने 2016 में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी. कैम्पस सलेक्शन में आकर्षक पैकेज के साथ चयन होने के बाद भी उसे छोड़कर सिविल सर्विस की तैयारी का रास्ता का चुना, ताकि समाज, क्षेत्र, जिले और राज्य के लिए अलग कर पाऊंगा. मैंने सबसे पहले दिल्ली के नामी कोचिंग संस्थान से यूपीएससी की तैयारी प्रारंभ किया और लगातार दो बार मेन्स मुख्य परीक्षा दी. वहां सफलता नहीं मिल पाई. इस के बाद मैंने 2017 से CGPSC की तैयारी करना शुरू की और परीक्षाएं देने लगा.

पांचवें प्रयास में मिली सफलता
विजय पटेल ने बताया कि यह मेरा पांचवां प्रयास था जिसमें सफलता मिली है. हर बार रैंक में बढ़ोतरी हुई है. सबसे पहले  बार 398 रैंक मिली थी. 2022 में पुनः CGPSC के मुख्य परीक्षा में सम्मिलित हो रहा हूं और आशा है कि इस बार मेरा राज्य सेवा की उच्च पद पर चयनित हो.

सोशल मीडिया से रहा दूर
मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर विजय ने बताया कि मोबाइल का बहुत ही सीमित उपयोग करता था. डिजिटल माध्यम से पढ़ाई तो करना चाहिए लेकिन इसमें बहुत ज्यादा डिस्टर्ब भी होता है. इसके लिए मैंने एक उपाय निकाला और मैं बिना सिम कार्ड के टेबलेट से पढ़ाई करता था. मैंने नालंदा परिसर में पढ़कर सफलता अर्जित की है. मैंने पिछले 2-3 सालों से कोई भी सोशल मीडिया का उपयोग नहीं किया है. इसके साथ कहा कि युवाओं को ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया से दूर रहना चाहिए. यह आपको फायदा कम नुकसान ज्यादा देता है. सोशल मीडिया की जानकारी के लिए दूसरे नाम की आईडी बनाकर एक्टिविटीज देखता था. ट्विटर में ज्ञान ज्यादा मिलता है, इसलिए ट्विटर में छत्तीसगढ़ सरकार का अकाउंट और न्यूज चैनलों के पेज से निरंतर अपडेट रहने की कोशिश करता था.

सफलता का एक ही मूल मंत्र
विजय के मुताबिक, सफलता के लिए लगातार प्रयास करते रहना चाहिए. अगर आपका लक्ष्य बड़ा है, तो बहुत ही ज्यादा संघर्ष करना और बलिदान देना पड़ेगा.

पारिवारिक पृष्टभूमि
महासमुंद जिले के सरायपाली में राजनीतिक परिवार से पले बढ़े विजय पटेल के पिता खेती किसानी करते हैं. साथ ही अघरिया समाज के अघरिया विकास समिति के अध्यक्ष हैं. माता पिछले 25 वर्षों से नगर पालिका सरायपाली की उपाध्यक्ष हैं. बड़े भैया बलौदा बाजार के कसडोल में तहसीलदार हैं. 4 साल पहले बड़े भैया भी 91 रैंक लाकर राज्य सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता हासिल कर चुके हैं. जबकि स्कूली शिक्षा मूलतः महासमुंद जिले के सरायपाली में हुई है.

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इस वजह से नहीं गया राजनीति में
विजय के मुताबिक, राजनीति में रुचि है, लेकिन परिवारवाद के खिलाफ होने की वजह से राजनीति में नहीं गया. मैंने सोचा कि राजनीति में जाने से पहले स्वयं अच्छे पद पर पहुंचकर सफलता प्राप्त करूं. अघरिया समाज के गौरव और छत्तीसगढ़ के पहले IAS ओपी चौधरी मेरे हमेशा आदर्श रहे हैं. वह पहले आईएएस बने और जन सेवा की. फिर राजनीति को चुना. इसी तरह भविष्य में ऐसा राजनीति में जाना हुआ तो मैं पहले अपने आप को इस काबिल बनाकर ही राजनीति में जाऊंगा न कि परिवारवाद का सहारा लेकर. उससे पहले राज्य सेवा के उच्च पद पर चयन होकर समाज, राज्य, जिला और क्षेत्र के लिए कुछ बेहतर करने की कोशिश रहेगी. इसके साथ विजय ने अपनी सफलता का श्रेय परिवारजनों मम्मी-पापा, भैया-भाभी को दिया है. साथ ही कहा कि सबसे ज्यादा श्रेय अपने भैया को देना चाहूंगा. उन्होंने मुझे हर समय सपोर्ट किया है. भैया ने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की थी, लेकिन मैं 5 वें प्रयास में सफल हुआ हूं.

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Author: Up Head Line

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