दक्षिण यूरोप में भीषण गर्मी पड़ रही है. वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि फ़्रांस, इटली और सहित तमाम दक्षिणी यूरोप के देश भीषण पानी की समस्या से जूझने वाले है, दशकों में यहां ऐसी स्थिति नहीं हुई है. जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे यूरोप में कृषि के साथ-साथ बिजली उद्योग के लिए कयामत आने की उम्मीद है. जहां एक ओर किसान दशकों में सबसे कम उपज की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जलविद्युत उत्पादन को भी भारी नुकसान होने की आशंका है. वालेंसिया में मरुस्थलीकरण अनुसंधान केंद्र के निदेशक पेट्रीसियो गार्सिया-फायोस ने यहां तक कहा कि आने वाले वर्षों में स्पेन का एक बड़ा हिस्सा रेगिस्तान बन जाएगा. वहीं, फ़्रांस भी साल 1959 के बाद से पहली बार भीषण सूखे की सामना कर रहा है. वैज्ञानिकों और रिसर्चरों का मानना यूरोप की ये स्थिति क्लाइमेट चेंज से हुई है. आइए जानते है यूरोप के कौन-कौन से देश भीषण सूखे की सामना कर रहे हैं और आने वाले भविष्य में इनके भौगोलिक परिदृश्य पर कैसा असर पड़ने वाला है.
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स्पेन को यूरोप के ‘बैक गार्डन’ के नाम से जाना जाता है. क्योंकि ये देश पूरे महाद्वीप को कृषि उत्पाद निर्यात करता है. लेकिन पिछले साल की तरह इस साल भी स्पेन भीषण गर्मी की मार झेल रहा, बारिश न होने से यहां, किसानों की उपज न के बराबर हुई है. स्पेन पानी की कमी के परिणामों को भुगतने वालों में से पहला देश होगा. (Wikipedia)
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फ्रांस24 न्यूज़ के अनुसार स्पेन का अप्रैल का महीना सबसे सूखा रहा है. इसके वजह से कृषि उत्पाद पर काफी असर पड़ा है. वहीं, एलिकांटे विश्वविद्यालय में जलवायु विज्ञान प्रयोगशाला के प्रमुख जोर्ज ओल्सिना ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि यहां, जलाशय अपनी क्षमता के 25 प्रतिशत से कम हो गए हैं. (Wikipedia)
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वालेंसिया में मरुस्थलीकरण अनुसंधान केंद्र के निदेशक पेट्रीसियो गार्सिया-फायोस ने कहा कि आने वाले वर्षों में स्पेन का एक बड़ा हिस्सा रेगिस्तान बन जाएगा. उन्होंने चेताते हुए कहा, ‘जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ना आवश्यक है और साथ ही यह भी सीखें कि अपने पानी का बेहतर प्रबंधन कैसे करें. अन्यथा, स्पेन का एक बड़ा हिस्सा कुछ वर्षों में रेगिस्तान बन जाएगा.’ (Wikipedia)
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पेरिस ने भी सूखे का अलर्ट जारी कर दिया है. ऐन, इसेरे, बाउचेस-डु-रोन और पाइरेनीस-ओरिएंटल राज्य में रहने वाले लोगों को गैर-प्राथमिकता वाले उद्देश्यों के लिए पानी का उपयोग करने से मना किया गया है, जिसमें उनके लॉन को पानी देना और उनके स्विमिंग पूल को भरना शामिल है. (Netherland Post English)
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दुःख की बात ये है कि पिछले जहां ये देश फ़ूड क्राइसिस (भोजन की कमी) से जूझ रहा था अब इस साल इस देश के किसानों को खेत में पानी का उपयोग करने से सरकार द्वारा मनाही की जा रही है. (Wikipedia)
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इसी प्रकार ग्लोबल वार्मिंग की मार से सूखे की सामना करने वालों में कई दक्षिण यूरोपीय देशों में पुर्तगाल भी है. यहां का 90% भू-भाग सूखे का सामना कर रहा है. वहीं, 20% भू-भाग भीषण अकाल का सामना कर रहा है. इसी प्रकार इटली का कृषि उद्योग लगातार दो सालों की पानी की कमी से सबसे बड़े संकट से जूझ रहा है. उत्तरी इटली में 70% स्नो वाटर रिज़र्व (Snow Water Reserve) की कमी है, वहीं, 20% भू-भाग की जमीन नमी की कमी से जूझ रहे हैं. (Wikipedia)
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विशेषज्ञ दक्षिणी यूरोप के साथ-साथ हॉर्न ऑफ अफ्रीका में भीषण गर्मी और पानी की कमी के लिए ‘जलवायु परिवर्तन’ को जिम्मेदार ठहराते हैं. सूखे से बचाव के उनका संक्षिप्त और जरूरी सलाह है- कई खेती वाले क्षेत्रों में अभी तक सटीक सिंचाई जैसी जल-बचत विधियों को अपनाना है या अधिक सूखा-प्रतिरोधी फसलों, जैसे कि सूरजमुखी पर स्विच करना है. (Wikipedia)








