
रवि पायक/ भीलवाड़ा. भीलवाड़ा जिले भर में लगातार कुछ दिनों से चल रहे बारिश के दौर के बाद अब एक बार फिर आसमान से आग बरसने लगी है. जिसके चलते तापमान में भी खासा इजाफा हुआ है. ऐसे में इसका सीधा असर भीलवाड़ा शहर के सड़क किनारे मिलने वाले मटकी और मटको पर भी पड़ रहा है. इस गर्मी के चलते अब मटके के दामों में भी इजाफा हुआ है मगर फिर भी गर्मी से राहत पाने के लिए लोग देसी फ्रिज को खरीदना पसंद कर रहे है.
भीलवाड़ा शहर में इन दिनों गुजरात ,जोधपुर,नसीराबाद, सहित अन्य जिलों से मटकिया बिकने के लिए आ रही हैं. इनकी कीमत की बात की जाए तो इनकी कीमत में वृद्धि हुई है जो 150 से लेकर 300 रुपये तक पहुंच गई है. इसके बावजूद बढ़ती गर्मी को देखते हुए लोगों में इसकी अच्छी खासी डिमांड देखने को मिल रही है और लोग फ्रिज का पानी पीने के बजाए मटकी का पानी पीना अधिक पसंद कर रहे हैं.
भीलवाड़ा शहर के अजमेर चौराहे पर अस्थायी दुकान लगाने वाले भागचंद प्रजापत बताते है कि कुछ दिनों पहले हो रही बारिश के बाद भीलवाड़ा में एक बार फिर गर्मी तेज पड़ने लगी है. जिसके चलते अब हमारा व्यापार अच्छा चलने की उम्मीद है. अब बारिश के बाद लोगों की एक बार फिर डिमांड होने के चलते मटको के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है. लोग भी मटकी की अच्छी खासी डिमांड कर रहे हैं. क्योंकि पानी की केन के मुकाबले मटकी में पानी ज्यादा ठंडा रहता है और किसी प्रकार का नुकसान भी नहीं करता है. भीलवाड़ा में जोधपुर से सफेद मटकी आ रही है जिसकी कीमत पहले 100 रुपये थी जो अब200 रुपये हो गई हैं वहीं नसीराबाद के काले मटके 300 रुपये के दाम में बिक रहे हैं. गुजरात की मटकी भी220 रुपये में बिक रही है.
वहीं दूसरी तरफ मटकी लेने के लिए आए ग्राहक अजय पाराशर ने कहा कि गर्मी का मौसम ने एक बार फिर अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है. जिसके चलते हम मटकी लेने के लिए आए हैं. यहां आने के बाद हमें पता चला की बढ़ती गर्मी के साथ मटकी के दाम में भी इजाफा हुआ है मगर फिर भी मटकी का पानी सेहत के लिए भी अच्छा रहता है और शीतल जल अंदर से शरीर को शीतल कर देता है. इसलिए चाहे दाम बढ़ते हो फिर भी हम मटकी लेकर अपने घर जाएंगे.
भागचंद प्रजापत कहते है कि आमतौर पर कुम्हार परिवार के लोग मटकी बनाना भीषण सर्दी में शुरू करते हैं. क्योंकि कहा जाता है कि जितनी ज्यादा सर्दी में मटकी बनेगी गर्मी के मौसम उसमें पानी उतना ही ठंडा होगा. इसलिए कुम्हार परिवार के लोग 70% काम सर्दी के मौसम में पूरा कर लेते हैं. वहीं गर्मी के मौसम में बेमौसम बारिश के चलते कहीं ना कहीं मिट्टी के सॉफ्ट मैटेरियल को कुछ हद तक खराब तो किया है. मगर जो मटकी तैयार हो गई थी उनके लिए यह काफी अच्छी साबित हुई है. क्योंकि मटकी जितना पानी में रहेगी उतनी मजबूत और ठंडक पहुंचेगी.
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FIRST PUBLISHED : May 16, 2023, 20:52 IST








