
सच्चिदानन्द, पटना. पांच दिवसीय हनुमंत कथा के दौरान तीसरे दिन दिव्य दरबार का आयोजन किया गया. हालांकि ज्यादा भीड़ ना हो इसके लिए पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने दिव्य दरबार नहीं लगाने की बात कह दी थी. पर, बाद में उन्होंने सामूहिक अर्जी की घोषणा की थी. इस दिव्य दरबार में कई लोगों की अर्जी लगी, तो वहीं कम समय होने की वजह से कई लोगों को बाबा से मिलने का मौका नहीं मिला. कई लोग बड़े ही आस के साथ सैकड़ों किमी दूर से आए हुए थे. बिना कुछ खाए-पिए तीन दिनों से इस दिव्य दरबार का इंतजार कर रहे थे. स
भी अपनी परेशानियों का समाधान पाने की उम्मीद से बागेश्वर बाबा के पास आए हुए थे. कई बार डॉक्टर से दिखाने के बावजूद जब डॉक्टर ने कह दिया कि अब दवा की नहीं दुआ की जरूरत है, तो ऐसे लोग बागेश्वर धाम सरकार के दरबार में पहुंच गए, ताकि इनके जरिए हनुमान जी की कृपा बने और दुःख दूर हो.
छत से गिरने से टूट गई थी रीढ़ की हड्डी
मोकामा से आई एक महिला ने बताया कि छत से गिर जाने के बाद उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई. कई डॉक्टरों को दिखाने के बाद कोई सुधार नहीं हुआ. फिलहाल वह चल नहीं सकती हैं. उनके कमर के नीचे का सारा हिस्सा सुन्न हो गया है. मोबाइल के जरिए इनको पता चला कि बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेंद्र शास्त्री पटना आ रहे हैं, तो लोगों ने सलाह दी कि उनके दिव्य दरबार में जाएं. भीषण गर्मी और भारी भीड़ के बावजूद घंटों बाबा का इंतजार करते रहे, लेकिन समय की पाबन्दी की वजह से इनकी अर्जी नहीं लगी. निराश होकर वापस जाना पड़ा.
बचपन ने बोल नहीं पा रहा लड़का
पूर्वी चंपारण से आए एक व्यक्ति का इकलौता बेटा बचपन से बोल नहीं पाता है. साथ ही मानसिक रूप से भी कमजोर भी है. लड़के के पिता बताते हैं कि कई डॉक्टर से दिखाने के बाद भी कोई सुधार नहीं है. डॉक्टर ने साफ कह दिया है कि अब कुछ नहीं हो सकता है. बाबा से मिलने की आस में सैकड़ों किलोमीटर से आए हुए हैं. घर का इकलौता लड़का है यह कहते हुए लड़के के पिता भावुक हो गए. आगे कहते हैं कि जबतक बाबा से मिल नहीं लेंगे, यहां से नहीं जाएंगे. अगर यहां मुलाकात नहीं होगी तो बागेश्वर धाम जाएंगे. अब बाबा ही अन्तिम आस हैं.
अचानक से अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाता बेटा
खगड़िया से आए एक दुखी पिता अपने बेटे के अचानक अपाहिज होने से परेशान थे. एक साल पहले तक उनके सामने दौड़ कर लिपट जाने वाला बेटा आज अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाता है. डॉक्टर कहते हैं कि अब दवा की नहीं दुआ की जरूरत है. पिता बताते हैं कि सुने हैं की बाबा बहुत चमत्कारी हैं. मेरी भी अर्जी सुन लेते तो जीवन भर दास बनकर रहता. कुछ ऐसी ही कहानी थी कथा स्थल पर पहुंचे हजारों लोगों की. सबका यही कहना था कि बाबा ही अब आखिरी सहारा हैं.
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FIRST PUBLISHED : May 16, 2023, 09:31 IST









