रायबरेली के इस मंदिर में आते ही उतर जाता है सांप का ज़हर, महाभारत काल से है जुड़ाव

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सौरभ वर्मा/रायबरेली. उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर लखनऊ-इलाहाबाद राजमार्ग किनारे स्थित हरचंदपुर विकास क्षेत्र के लालूपुर गांव के आस्तिक बाबा मंदिर की कहानी और मान्यता आपको आश्चर्यचकित कर देगी. लोगों में मान्यता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को जहरीले सर्प ने काट लिया है तो इस मंदिर में पहुंचने मात्र से ही वो ठीक हो जाता है. उसे किसी प्रकार के इलाज की जरूरत नहीं पड़ती है. साथ ही, आस्तिक बाबा का नाम लेने मात्र से आपको सांपों से भय नहीं लगेगा. बताया जाता है कि यह मंदिर महाभारत काल से ताल्लुक रखता है.

सावन माह के चतुर्दशी को यहां पर विशालकाय मेला लगता है. इसमें रायबरेली जनपद समेत आस-पास के जिलों के भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं.

नाम उच्चारण से लोगों में खत्म हो जाता है सांपों का डर

न्यूज़ 18 लोकल से बात करते हुए आस्तिक बाबा मंदिर के पुजारी अमित तिवारी ने बताया कि नाग पंचमी के एक दिन पहले यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु इसलिए आते हैं, क्योंकि उन्हें साल भर सांप के कोप का शिकार न होना पड़े. वो बताते हैं कि हमारे पूर्वज बताते थे कि इस मंदिर से पांडवों का भी जुड़ाव रहा है. एक बार राजा परीक्षित जंगल में शिकार करने गए थे जहां उनके बाणों से एक हिरण घायल हो गया था, लेकिन वो घायल हिरण उनके सामने से गायब हो गया तो राजा ने आस-पास देखा तो उन्हें पास में बैठे एक ऋषि दिखाई दिए.

राजा परीक्षित ने जब ऋषि से इसके बारे में जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने कुछ नहीं बताया. इससे राजा कुपित हो गए और उनके गले में एक मृत सांप पहना दिया. वहां मौजूद ऋषि के पुत्र श्रंगी ने यह देखा तो उन्होंने राजा को श्राप दे दिया कि तुम्हें एक सप्ताह के भीतर सबसे जहरीला सर्प तक्षक डंस लेगा. जब इसकी जानकारी राजा परीक्षित के पुत्र जन्मेजय को हुई तो उन्होंने सांपों को भस्म करने के लिए विशालकाय यज्ञ किया जिसमें सांप भस्म होने लगे. तब आस्तिक महाराज ने यज्ञ को बंद करवा कर तक्षक को बचा लिया. तब से ऐसा माना जाता है कि आस्तिक महाराज का नाम लेने से लोगों को सांप से डर नहीं लगता.

अपने प्राणों की रक्षा के लिए लगाते हैं गुहार

मंदिर में दर्शन करने आए श्रद्धालु शिव प्रसाद ने बताया कि बीते सावन के महीने में मेरी पत्नी को सांप ने डंस लिया था. तब मैं उसको लेकर यहां आया जिससे वो ठीक हो गई. कहीं पर भी मुझे किसी प्रकार की इलाज करवाने की जरूरत नहीं पड़ी. तब मैंने यहां मन्नत मानी थी कि मैं यहां अपनी पत्नी व परिवार के साथ आकर पूजा-अर्चना करूंगा, इसलिए मैं मंदिर आया था.

Tags: Dharma Aastha, Mahabharat, Raebareilly News, Snake Venom, Up news in hindi

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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