
अभिलाष मिश्रा/ इंदौर: इंदौर की रहने वाली रुचि श्रोती पौधों और उनके औषधीय महत्व पर बहुत सी रिसर्च कर चुकी हैं. रुचि के द्वारा की गई रिसर्च इंटरनेशनल लेवल पर स्वीकार की गई हैं. आयुर्वेद में बहुत से ऐसे पौधों का जिक्र किया गया है, जिनका उपयोग करके बड़ी से बड़ी बीमारी को भी ठीक किया जा सकता है.रुचि बताती हैं कि आयुर्वेद से संबंधित बहुत से ऐसे पौधे हैं जो बहुत ही गुणकारी हैं और लाइलाज बीमारियों में भी प्रयोग किए जाते हैं. बहुत से पौधे तो ऐसे हैं जो बहुत गुणकारी होने पर भी विलुप्त होने की कगार पर हैं.इसलिए हर एक व्यक्ति को इनके बारे में जानना बहुत जरूरी है.
रुचि ने कहा कि टिशू कल्चर एक तकनीक होती है. जिसकी मदद से विलुप्त हो रहे पौधों को बचाया जा सकता है. अगर हमारे पास किसी प्रजाति का एक पौधा भी बचा है तो उससे कई पौधें बनाये जा सकते हैं. रुचि बताती हैं कि वे इस क्षेत्र में 2008 से काम कर रही हैं.उन्होंने सबसे पहली बार यूरोफिया को लेकर रिसर्च किया, जो नेक और ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में काम करता है, यह काफी रेयर है. जिस कारण से हमने इसका टिशु कल्चर किया. फिर स्टलाइजेशन के जरिए उसे वायरस और बैक्टीरिया मुक्त बनाया और फिर उसे एक्सप्लांट किया. यह पूरी रिसर्च यूरोफियन जर्नल आफ रिसर्च एंड बायो टेक्नोलॉजी में पब्लिश है.
रुचि बताती हैं कि यह एमपी और पूरे इंडिया का पहला टिशू कल्चर वर्क था. रुचि बताती हैं कि आज भी इन रिसर्च के रेफरेंस देकर बहुत से लोग इन्हें समय-समय पर प्रकाशित करते रहते हैं. शीशम, चिरौंजी ,ब्राह्मी ,शंखपुष्पी को लेकर बहुत सारे रिसर्च किए गए और यह सारी रिसर्च इंटरनेशनल लेवल पर पब्लिश की गयी हैं.रुचि का कहना है कि हमेशा से ही उनकी इन सब चीजों में दिलचस्पी रही. इसलिए इस काम को आगे भी जारी रखने वाली हैं.
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FIRST PUBLISHED : May 14, 2023, 20:34 IST








