
नरेश पारीक/चूरू: कहते हैं कि जिंदगी आपके हौसलों को आजमाती है, आखिरी लम्हों तक राहों से भटकाती है. लेकिन जिनके इरादे बुलंद होते हैं, रुकावटें उनको रोक नहीं पाती हैं. मदर्स डे के असवर पर एक ऐसी ही मां कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं, जो खुद तो छठी पास है, लेकिन अपनी बेटियों को अच्छी तालीम दी और आईएएस और आईआरएस अफसर बनाया.
चार बेटियों की मां सुशीला राजपाल, जिन्होंने अपनी बेटियों के भविष्य के लिए अपने सपनों और अपनी ख्वाहिशों की आहुति दे दी. बेटियों को इतना प्रेरित किया और काबिल बनाया कि सुशीला राजपाल की आज चार बेटियों में से तीन बेटियां अफसर हैं. सबसे बड़ी बेटी सुनीता कॉपरेटिव बैंक में सीनियर मैनेजर है. दूसरी बेटी मंजू सीनियर IAS अफसर है और तीसरी अंजू सीनियर RAS अफसर है.
मां थी पढ़ाई के लिए गम्भीर
सुशीला राजपाल की अफसर बेटियां बताती हैं कि भले ही उनकी मां छठी तक पढ़ी हों, लेकिन वह हमारी पढ़ाई के लिए काफी गंभीर थीं. हमारी पढ़ाई के लिए उन्होंने बाहर आना-जाना भी छोड़ दिया. वह हमारी हर एक बात का ख्याल रखती थीं. हमें प्रेरित करती थीं, उसी का परिणाम रहा कि आज चार में से तीन बेटियां उच्च पदों पर आसीन हैं, जबकि एक बेटी गृहणी है.
‘बेटियां भी बेटों जैसी’ यह मापदंड गलत
कॉपरेटिव बैंक में सीनियर मैनेजर के पद पर कार्यरत सुनीता राजपाल कहती हैं कि अक्सर हम कहते हैं कि बेटियां भी बेटों जैसी हैं. मुझे लगता है कि यह मापदंड ही गलत है. आज एक पढ़ी-लिखी बेटी अफसर बन सकती है और एक पढ़ी-लिखी बहू पति के पास जॉब नहीं होने पर घर चला सकती है तो ये मापदंड गलत है. बदलते वक्त के साथ ये पैरामीटर अब नहीं रहा.
पिताजी का था जनरल स्टोर
सुनीता ने बताया कि उनकी सभी बहनों ने सेल्फ स्टडी के दम पर ही सफलता हासिल की. मां और पिता रमेशचंद राजपाल हमे प्रेरित करते थे और घर में हमारे लिए पढ़ाई का माहौल ऐसा बनाया की कहीं बाहर रहकर तैयारी की आवश्यकता ही नहीं महसूस की. सुनीता ने बताया कि उनका परिवार बेहद ही साधारण था. परिवार में ऐसा कोई नहीं था, जो गवर्नमेंट जॉब में हो. पिताजी की शहर में ही जनरल स्टोर थी. ऐसे में चूरू की सरकारी स्कूलों में ही शुरुआती शिक्षा ग्रहण की.
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FIRST PUBLISHED : May 13, 2023, 21:56 IST








