MP Assembly Election 2023 : मध्य प्रदेश की ‘लाडली’ ‘नारी’ तय करेंगी कौन बनेगा विधायक, दिलचस्प है मुकाबला

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भोपाल. मध्यप्रदेश की 50 से ज्यादा सीटों पर लाड़ली बहनों का दबदबा है. विधानसभा चुनाव से पहले बहनों को सरकार औऱ विपक्षी पार्टियां लुभाने में जुटी हुई हैं. ट्राइबल सीटों पर आदिवासी बहनें दूसरे वोटर्स पर भारी साबित होने वाली हैं. लाड़ली बहना योजना के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी आदिवासी बहुल जिलों में विशेष योजना के साथ रणनीति पर लगातार काम रही है. 50 से ज्यादा सीटों और  ट्राइबल क्षेत्रों में लाड़ली बहना योजना गेम चेंजर साबित होने वाली है. आधी आबादी जिस भी पार्टी की तरफ अपना रूझान करेगी,उस पार्टी की जीत आसान होगी. चुनाव से पहले आधी आबादी को सभी पार्टियों की तरफ से साधने की कोशिश हो रही है.

महिलाएं तय करेंगी अपना विधायक
विधानसभा की 50 से ज्यादा सीटें ऐसी हैं जहां महिला वोटर्स निर्णायक भूमिका में हैं. 12 से ज्यादा सीटों पर लाड़ली बहनों की संख्या पुरुषों के मुकाबले ज्यादा है. इनमें ज्यादातार सीटें आदिवासी अंचल से हैं. 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को इन सीटों पर नुकसान उठाना पड़ा था. झाबुआ, अलीराजपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी जिलों में महिला मतदाताओं की संख्या ज्यादा है. भाजपा ने महिलाओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करने में कामयाब हो रही है. कांग्रेस भी अब महिलाओं को साधने के लिए रोजगार से लेकर 1500 रूपए सभी महिलाओं को देने की योजना शुरू कर रही है. महिला वोटर्स को जो भी पार्टी साधने में कामयाब रहेगी उसे सत्ता तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता.

ज्यादातर विधानसभाओं में महिला मतदाता निर्णायक
विधानसभा चुनाव में ज्यादातर सीटों पर महिलाओं के निर्णायक साबित होने पर भाजपा का कहना है आधी आबादी को पूरा हक देने का काम भाजपा सरकार और सीएम शिवराज सिंह चैहान ने किया है. ऐसी कोई भी विधानसभा सीट मप्र में नहीं है, जिसमें बड़ी संख्या में महिला मतदाता ना हों. इसलिए बहुत स्वाभाविक है एससी हों या एसटी या अनारक्षित सीट. हर विधानसभा में महिलाएं बड़ी संख्या में हैं. बीजेपी इससे पहले भी महिलाओं के लिए लाड़ली लक्ष्मी, कन्यादान योजना, शिक्षा स्वास्थ्य के लिए कई योजनाएं शुरू कर चुकी है.

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अब सिर्फ बदलाव ही काम आएगा
विधानसभा चुनाव में महिलाओं के गेमचेंजर होने पर कांग्रेस का कहना है जब जनता यह सब तय कर लेती है तो हमें इस गेम को ध्वस्त करना है तो कोई चेंजर काम नहीं आएगा. सिर्फ बदलाव ही काम आएगा. हमारे नेता पीसीसी चीफ कमलनाथ ने स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस की सरकार बनते ही बहनों को डेढ़ हजार रूपए प्रतिमाह देंगे. बहनों का सीधा सामना रसोई गैस से होता है. जब सिलेंडर के दाम कम होंगे तो महिलाओं को राहत मिलेगी. हमारी सरकार में 23साल से कम की बहनों और 60 साल से उपर की सभी वास्तविक बहनों को शामिल किया जाएगा.

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Author: Up Head Line

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