Gaya News : बंद हो गईं मशीनें, प्रदेश लौट गए मजदूर, कोरोना में उद्योग विभाग की शुरू हुई योजना बंद, जानें वजह

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कुंदन कुमार/गया. सरकारें योजना तो बहुत बनाती है. कई सफल होती है और कई बंद. कोरोना काल के दौरान दूसरे प्रदेश से लौटकर वापस अपने घर पहुंचे श्रमिकों को राज्य सरकार ने जिले में ही रोजगार देने की घोषणा की थी. इसके बाद कई श्रमिकों को रोजगार दिया गया.

गया जिले में भी वैसे श्रमिकों को रोजगार से जोड़ने के लिए जिला उद्योग विभाग के द्वारा औद्योगिक नवप्रवर्तन क्लस्टर योजना के तहत 10 श्रमिकों का क्लस्टर बनाकर जिले के डोभी प्रखंड क्षेत्र के सबलबीघा गांव में रेडीमेड गारमेंट्स का उद्योग लगाया गया. इसके लिए उन युवाओं को 2 लाख 20 हजार रुपया कैश तथा 5 लाख रुपये की लागत से 15 से अधिक हाईटेक सिलाई मशीन दी गई थी. पर अब बंद हो गई है.

इस वजह से चलता फिरता उद्योग हुआ बंद
उद्योग लगने के बाद बेहतर तरीके से इस काम को किया जा रहा था. इन युवाओं द्वारा सिलाई किए गए कपड़े जिले तथा जिले के बाहर भेजे जा रहे थे. श्रमिकों द्वारा की जा रहे काम को तत्कालीन उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन ने देखा था. उन युवाओं की तारीफ की थी.

आपके शहर से (गया)

2 साल तक यह उद्योग बहुत ही बढ़िया चला.लोगों को अच्छी आमदनी हो रही थी, लेकिन विभाग से बेहतर सहयोग नहीं मिलने और क्लस्टर के युवाओं में आपसी मतभेद के कारण रेडीमेड गारमेंट्स का यह उद्योग धीरे-धीरे बंद होता गया.आज पिछले देढ साल से यह उद्योग बंद पड़ा हुआ है. विभाग के द्वारा दी गई मशीनें तख्ते पर धूल फांक रही है.यह सभी श्रमिक काम बंद करके वापस दिल्ली, मुंबई और कोलकाता चले गए हैं.

यह भी रहा मुख्य वजह, तैयार होता था यह प्रोडक्ट
न्यूज18 लोकल ने जब इस गांव में पहुंचकर पूरे स्थिति की जानकारी ली तो पता चला कि क्लस्टर के युवाओं में आपसी मतभेद और विभाग के द्वारा शेष 3 लाख रुपया नहीं मिलने के कारण यह उद्योग धीरे-धीरे बंद हो गया. गांव में क्लस्टर का कोई भी व्यक्ति नहीं था. सभी रोजी रोटी के लिए दूसरे प्रदेश चले गए है. उनके परिजनों ने पूरी स्थिति की जानकारी दी.

बताया गया कि विभाग के द्वारा दी गई 1500से अधिक सिलाई मशीन तख्ते पर धूल फांक रही है. बता दें कि रेडीमेड गारमेंट्स के उद्योग लगाने के लिए सबलबिघा गांव के शमशाद, फिरोज, सूडडू, हसीब अंसारी, मेराजुद्दीन, जाकिर समेत 10 लोगों का क्लस्टर बनाया गया था.इस क्लस्टर में शर्ट, पैंट, कुरती, प्लाजो आदि बनाए जा रहे थे. यह रोजगार बढ़िया चल रहा था. उसके बाद क्लस्टर के लिए 5 डिसमिल जमीन चिह्नित किया गया था. जिस पर रेडीमेड गारमेंट्स निर्माण के लिए वर्क शेड बनाया जाना था.

उद्योग विभाग को नहीं थी जानकारी
इस संबंध में जब हमने उद्योग विभाग के महाप्रबंधक वीरेंद्र सिंह से बात की तो उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि डोभी के सबल बिघा गांव में श्रमिकों को द्वारा चलाया जा रहा रेडिमेड गारमेंट्स का उद्योग पिछले देढ साल से बंद है.

न्यूज 18 लोकल के द्वारा रेडीमेड गारमेंट्स का उद्योग बंद होने की सवाल पर उन्होंने बताया कि आपके द्वारा यह सूचना मिली है. इस पर हम लोग जांच करवा कर कार्रवाई करेंगे. महाप्रबंधक ने बताया कि हम लोगों ने जब उद्योग लगाया था, तो यह बेहतर ढंग से यह चल रहा था. बीच में दो लोगों के बीच कुछ मतभेद हुआ था, जिसके बाद एक युवक काम छोडकर मुम्बई चला गया गया, लेकिन बांकीलोगों के द्वारा यह काम हो रहा था. अब यह काम बंद है, इसकी हमलोग जांच कराएंगे.

वहीं विभाग के द्वारा सहयोग नहीं मिलने के सवाल पर उन्होंने बताया कि यह बिल्कुल गलत बात है. मशीन देने के बाद हमलोगो ने उनको 2 लाख 20 हजार रुपया दिया है और जब तक वह प्रोडक्शन करके जमा नही करेगा तब तक नेक्स्ट पैसा रिलीज नही किया जाता. उन्होंने जमा नहीं किया जिस कारण उनकी राशि रुकी हुई है अन्यथा विभाग के तरफ से उन्हें किसी भी तरह की कोई कठिनाई नहीं था और यह उद्योग बेहतर तरीके से चल रहा था.

उनकी आपसी मतभेद के कारण बंद हुई है इसकी जांच कराऊंगा. अगर जांच में यह उद्योग बंद पाया जाता है तो उन मशीनों को उसी गांव के बेरोजगार युवक और जीविका दीदियों का चयन करके दिया जाएगा और शेष रुपये उन्हे दिए जाएंगे ताकि जरुरतमंद को रोजगार का अवसर प्रदान किया जाएगा.

Tags: Bihar News, Gaya news

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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