मो यासीन
कौशाम्बी– जनपद के सिराथू तहसील क्षेत्र के कड़ा में स्थित ख्वाजा कड़क शाह अब्दाल की दरगाह पर 731 वां उर्स धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह दरगाह सदियों से हिन्दू -मुस्लिम समुदाय की आस्था का केन्द्र बिंदु रही है। दरअसल यहां उर्स की शुरुआत गंगा जल के आचमन के साथ होती है।उर्स की खासियत यह है कि मुस्लिम समुदाय के श्रद्धालु कतारबद्ध खड़े होकर प्रसाद के रूप में एक बूंद गंगा जल लेते हैं। 26 दिसम्बर तक चलने वाले उर्स मेले में दुरदराज से जायरीन आते हैं और जियारत करते हैं। इस उर्स की महत्ता विशेष रूप से गागर जुलूस है जो कि कल निकाला गया था।उर्स मेले में
देश-विदेश से भी लोग उर्स मेले में आते हैं।बताया जाता है कि ख्वाजा कड़क शाह अब्दाल के अनुयायी वर्तमान में पूरे विश्व में पाए जाते हैं, इसलिए उर्स मेले के दौरान देश-विदेश से श्रद्धालु कड़ा पहुंचते हैं और मजार में माथा टेकते हैं। ख्वाजा कड़क शाह को पसंदीदा मीठा खाजा, बुंदिया, खुर्मा, बतासा चढ़ाते हैं। गुलाब की पखुड़ियां एवं माला चढ़ाते हैं। फातिया पढ़ते हैं और दुआ मांगते हैं।ऐसी मान्यता है कि ईरान से आकर कड़ा में बसे सैय्यद ख्वाजा कड़क शाह अब्दाल उच्च कोटि के फकीर थे और अलाउद्दीन खिलजी के गुरू थे। माना जाता है कि इसी फकीर की दुआ पाकर अलाउद्दीन कड़ा के सूबेदार पद से भारत का बादशाह बना था। ख्वाजा कड़क शाह अपने चमत्कारिक व्यक्तित्व के चलते हिन्दू एवं मुस्लमानों के बीच सामान आस्था का केन्द्र बने रहे हैं। गरीबों के प्रति दया भाव, साधु फकीरों की सेवाभाव, असहाय व्यक्तियों को भोजन, दुखियों की पीड़ा का निवारण कर उन्हें सुख पहुंचाना इनका कार्य था।उर्स के मौके पर तमाम तरह की दुकाने भी सजती हैं जिसमे लोग खरीददारी करते है यही नही झूले, सर्कस आदि का लुत्फ उठाते हैं।सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर जगह-जगह पुलिस कर्मी मुस्तैद रहे।









