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सरायअकिल के मुस्तफाबाद सादात गांव में शनिवार को मरहूमा कनीज सुकैना बिन्ते मरहूम अंसार हुसैन के चालीसवें की मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस को ईरान के रहबर आयतुल्ला सिस्तानी के वकील लखनऊ से आए आलीजनाब मौलाना सैयद अशरफ अली गरवी ने खिताब किया। मजलिस में मौजूद लोगों ने मरहूमा के खानवादे को पुरसा दिया।
मुस्तफाबाद सादात स्थित इमामबाड़ा सज्जादिया में मजलिस की शुरुआत सोजख्वानी से की गई। सोजख्वानी जनाब रफाकत हुसैन, महताब हुसैन व नाजिम हुसैन ने पढ़ी। इसके बाद जनाब हसन अतरसुइयावी, जनाब हसनैन, जनाब शाहिद, जनाब हैदर मेंहदी और जनाब साहिल मुस्तफाबादी आदि शायरों ने ताजियाती नज्म पेश किया। ईरान के रहबर आयतुल्ला सिस्तानी के वकील आली जनाब मौलाना सैयद अशरफ अली गरवी ने मजलिस को खिताब करते हुए बताया कि इंसान मर जाता है लेकिन उसका किरदार हमेशा जिंदा रहता है। उन्होंने आखिरी नबी मोहम्मद मुस्तफा (स.) की बेटी फातिमा की सीरत बयां करते हुए महिलाओं से उनकी सीरत से सबक लेने और उनके नक्शे कदम पर चलने की सलाह दी। कहा फातिमा जहरा का जीवन औरतों के लिए मिसाल बना। उन्होंने महिलाओं को इबादत के साथ नेक तरीके से जिंदगी गुजारने का सलीका बताया। आखिर में उनके साथ हुए जुल्म को बयान किया जिसे सुनकर लोगों की आंखें भर आईं। मसायब सुनकर अजादार जारो-कतार रोने लगे। मजलिस के बाद मौजूद लोगों ने खानवादे को पुरसा दिया।






