प्रयागराज के यादगार ए हुसैनी इंटर कालेज में श्रद्वालुओं के रहने-खाने का किया प्रबंध
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कुम्भ के आयोजन स्थल से इस साल मुसलमानों का आर्थिक बहिष्कार कर उन्हें दूर रखा गया था। लेकिन, कुम्भ में मची भगदड़ के हादसे के बाद मुसलमान बहिष्कार की परवाह किये बिना अपने-अपने इलाकों में भीड़ में फंसे श्रद्धलुओं की सेवा के लिए आगे आ गए हैं। वो अपने घर, द्वार और मस्जिदों के दरवाजे उनके लिए खोल दिए हैं। उनके खाने-पीने और रहने का इंतजाम कर रहे हैं।

कुम्भ के आयोजन से दूर रहने के बावजूद इलाहाबाद के स्थानीय मुसलमान संकट में फंसे श्रृद्धालुओं की मदद करने के लिए अपने घरों से निकलकर सड़कों पर उतर चुके हैं। चौक के समीप स्थित यादगार ए हुसैनी इंटर कालेज में उनके लिए भोजन, पानी, कपड़ा, दवा, और आश्रय का इंतजाम किया। इंटर कालेज के जिम्मेदार श्रद्वालुओं के लिए रहने-खाने और पीने के लिए सारा इंतेजाम किए। इलाहाबाद से ऐसे कई विडियोज और तस्वीरें सामने आ रही है, जो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि हमारी जड़ें कितनी गहरी है। कोई नेता या संत सियासत तो कर सकता है, लेकिन लोगों के दिलों को आपस में बांट नहीं सकता है। इसके अलावा गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करते हुए स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी कई इलाकों में श्रद्धालुओं की सेवा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने चौराहे पर स्टॉल लगाकर नि:शुल्क चाय और बिस्कुट का वितरण किया। यादगार ए हुसैनी इंटर कालेज के मैनेजर जनाब गौहर काजमी ने अपनी टीम और मोहल्ले के लोगों की मदद से श्रद्वालुओं की सेवा की। प्रोफेसर एहसान अब्बास ने कहा कि भारत की पहचान इसी गंगा-जमुनी संस्कृति से है, जो राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। उनका संदेश स्पष्ट था-हम सब एक हैं।






