Space Travel Adversely affect Astronauts Immune Systems increasing Infection Risks says Study

हाइलाइट्स

अंतरिक्ष में यात्रियों के शरीर पर गुरुत्वहीनता और अन्य प्रभाव पड़ते हैं.
इसकी वजह से उनके प्रतिरोध क्षमता कमजोर हो जाती है.
देखने में आया है कि इसकी वजह से यात्रियों में संक्रमण देखने को मिलता है.

अंतरिक्ष यात्रा का इंसानों पर क्या असर होता है. इस पिछले कुछ दिनों से काफी खुलासे हुए हैं. हाल के कुछ सालों में वैज्ञानिकों ने इंसान के अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने की प्रभावों के अध्ययनों पर जोर देना शुरू किया है. इसमें त्वचा, श्वसन तंत्र और अन्य सेहत संबंधी सामान्य प्रभाव अंतरिक्ष यात्रियों में देखने को मिले हैं. लेकिन जीन के स्तर पर अंतरिक्ष में गुरुत्वहीनता का उन पर क्या असर होता है यह अभी तक साफ नहीं हो पाया था. नए अध्ययन में देखा गया है कि अंतरिक्ष में यात्रा जीन के स्तर पर सफेद रक्तकोशिका में जीन अभिव्यक्ति में हुए बदालव ला सकती है जिससे प्रतिरोधी तंत्र कमजोर हो सकता है.

प्रतिरोधी तंत्र हो जाता है कमजोर
इस अध्ययन से पता चला है कि प्रतिरोधी तंत्र कमजोर होने से अंतरिक्ष यात्रियों में यात्रा के दौरान संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है. मिसाल के तौर पर देखा गय है  इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में रहने वाले अंतरिक्षयात्रियों को त्वचा पर लाल दाने देखने को मिलतेहैं और साथ ही श्वसन और अन्य सामान्य बीमारियां देखने को मिलती है.

कई तरह के संक्रमण
फ्रंटियर्स ऑफ इम्यूनोलॉजी नाम के ऑनलाइन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक देखा गया है कि अंतरिक्ष यात्रियों को एप्स्टीन बार वायरस, शिंग्ले के लिए जिम्मेदार वैरिसेला जोस्टर, घावों के लिए हेर्पस सिम्पलेक्स-1 और सायटोगैलोवारस जैसे वायरस कणों से संक्रमित पाया गया है. इस शोध को कनाडा स्पेस एजेंसी ने वित्त पोषित किया है.

तेजी से कमी और फिर देर से बहाली भी
कनाडा की यूनिवर्सिटी ओटावा के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ ओडेटे लैनेयूविली ने बताया कि इस अध्ययन में दर्शया गया है कि प्रतिरोध से संबंधित बहुत सारी जीन की अभिव्यक्ति तेजी से तब गिरने लगती हैं जैसे ही इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से कोई यात्री अंतरिक्ष में पहुंचता है. वहीं जब वह पृथ्वी पर लौटता है तो उसके छह महीने बाद इसका विपरीत प्रभाव देखने को मिलने लगता है.

जीन अभिव्यक्ति में बदलाव
शोधकर्ताओं ने 2015 से 2019 के बीच इंटरनेशनल स्पेस स्टेशनल में रहने वाले 11 पुरुष और 3 महिला वाले कुल 14 अंतरिक्ष यात्रियों के दल के सदस्यों  की सफेद रक्त कोशिका यानि ल्यूकोसाइट्स  में जीन अभिव्यक्ति क पड़ताल की.पाया गया कि करीब 15410 जीन ल्यूकोसाइट्स को अलग तरह से अभिव्यक्त कर रही हैं.

Tags: Research, Science, Space, Space travel

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Jagran Times
Author: Jagran Times

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