International Soya Food Conference : स्वस्थ भारत के लिए सोयाबीन जरूरी, लेकिन दुनिया के मुकाबले सिर्फ ढाई फीसदी उत्पादन


इंदौर. मध्यप्रदेश में प्रति एकड़ सोयाबीन के कम उत्पादन ने सरकार को भी चिंता में डाल दिया है. अमेरिका में सोयाबीन का उत्पादन प्रति एकड़ दोगुना है, लेकिन भारत में प्रति एकड़ सिर्फ आधा है. इसे बढ़ाने की जरूरत है. प्रदेश के के एमएसएमई मंत्री ओम प्रकाश सखलेचा ने इस पर चिंता जाहिर की है. उन्होंने कहा- इसके लिए कृषि मंत्रालय के साथ ही साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्रालय को विचार करना चाहिए. ताकि सोयाबीन के उत्पादन में भारत आत्मनिर्भर बन सके.

इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 9वां अंतर्राष्ट्रीय सोया खाद्य सम्मेलन शुरू हुआ. इस कार्यक्रम में शामिल हुए प्रदेश के एमएसएमई मंत्री ओम प्रकाश सखलेचा ने सोयाबीन का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है. उन्होंने कहा सोयाबीन में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन होता है, स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है. ऐसे में ये प्रयास होना चाहिए कि सोयाबीन उत्पादों का सेवन ज्यादा से ज्यादा लोग करें. इसका सेवन बढ़ने से देश का हर नागरिक स्वस्थ होगा. हमें हेल्दी इंडिया की आवश्यक्ता है, तभी तो आत्मनिर्भर भारत बनेगा. इसलिए सोयाबीन उत्पादों का निर्माण करने वाली कंपनियों को सरकार अपना पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं. हालांकि कीमतों के कारण मध्यप्रदेश में 10 प्रतिशत सोयाबीन उत्पादन कम हुआ, लेकिन भारत का सोयाबीन उत्पादन बढ़ा है.

सोयाबीन उत्पादों को बढ़ावा देने में सहयोग करेगी सरकार
मंत्री ओम प्रकाश सखलेचा ने कहा प्रधानमंत्री मौजूदा सोयाबीन उत्पादन को दोगुना करना चाहते हैं. इसके अलावा यह भी प्रयास है कि सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता वाले सोयाबीन तेल का उत्पादन हो सके. इसके लिए उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है. प्रदेश में सोयाबीन के प्रसंस्करण संयंत्र कम हैं. सोयाबीन उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए हम प्रदेश में दो-तीन क्लस्टर बनाने को तैयार हैं. प्रदेश सरकार अपने इको सिस्टम के साथ हर तरह की मदद देने को तैयार है. हम उद्योग लगाने से लेकर उसे उसे चलाने तक में सहयोग देने को तैयार हैं. सोयाबीन के उत्पादों के निर्माण पर भी प्रदेश सरकार अनुदान दे सकती है. आज आप जितना भी एक साल में निवेश करेंगे, वो चार साल में आपको अनुदान के रूप में मिलेगा.

 सोयाबीन उत्पादन में भारत का शेयर मात्र 2.5 फीसदी
अमेरिका में सोयाबीन से प्रोटीन निकालकर लिक्विड, पावडर और सीरप के रूप में वहां के लोग उपयोग कर रहे हैं. गेहूं के मुकाबले सोयाबीन से कम खर्च में कई गुना ज्यादा प्रोटीन मिलता है. इसे सरकार के फीडिंग प्रोग्राम में शामिल किया जाना चाहिए. गिरीश मतलानी ने बताया कि इंदौर की 125 आंगनबाड़ियों के 12 हजार बच्चों को दूसरे भोजन के साथ 15 फीसदी सोयाबीन दिया गया. उससे उन बच्चों की ग्रोथ और स्वास्थ्य में 39 फीसदी तक बढ़ोतरी देखने को मिली. बावजूद इसके सोयाबीन के कुल उत्पादन में भारत का शेयर मात्र 2.5 फीसदी ही है. 97.5 फीसदी उत्पादन यूएस, अर्जेंटीना, ब्राजील और कुछ एक दो देश मिलकर करते हैं. सोयाबीन प्रोडक्शन में हमारा बहुत ही छोटा हिस्सा है, इसे बढ़ाने की जरूरत है.

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Author: Jagran Times

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