महंगाई से नहीं खत्म हुई लड़ाई, आरबीआई गवर्नर ने कहा- काम अभी बाकी, रेपो रेट में आगे क्या होगा कह पाना मुश्किल


हाइलाइट्स

खुदरा महंगाई दर आरबीआई के लक्षित दायरे में है.
आरबीआई को महंगाई दर 2-6 फीसदी के बीच रखनी होती है.
अप्रैल और मई में महंगाई दर 5 फीसदी से नीचे रही.

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि द्रास्फीति को निर्धारित दायरे के भीतर लाना अभी आधा काम पूरा होने जैसा है. गर्वनर शक्तिकांस दास ने ये बातें मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में कहीं थी, जिसका ब्योरा गुरुवार को जारी किया गया. जारी दस्तावेजों के अनुसार, आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारत के वृहद-आर्थिक आधार मजबूत हो रहे हैं. बीती 6-8 जून को हुई एमपीसी की बैठक में रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर रखने का फैसला किया गया था.

यह लगातार दूसरा मौका था जब रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया गया. आरबीआई गवर्नर ने कहा था कि वृद्धि की संभावनाएं लगातार बेहतर हो रही हैं और उनका विस्तार हो रहा है. उन्होंने बैठक में कहा कि मुद्रास्फीति कम हुई है लेकिन यह अब भी लक्ष्य से ऊपर है. बैंकों और कंपनियों के बहीखाते स्वस्थ दिखाई देते हैं.

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काम अभी अधूरा
दास ने कहा, “मुद्रास्फीति को निर्धारित सीमा के भीतर लाने का हमारा काम अभी आधा ही हुआ है. मुद्रास्फीति के खिलाफ हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. हमें उभरते मुद्रास्फीति-वृद्धि परिदृश्य का आकलन करने की जरूरत है और जरूरत होने पर कदम उठाने के लिए तैयार रहना होगा.” एमपीसी बैठक के ब्योरे के मुताबिक, आरबीआई गवर्नर ने कहा, “मौजूदा दौर की अनिश्चितताओं को देखते हुए नीतिगत दर में बढ़ोतरी के इस चक्र में अगला कदम क्या होगा इस बारे में कोई निश्चित मार्गदर्शन दे पाना मुश्किल है.”

काबू में महंगाई
सरकार ने आरबीआई को खुदरा मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत घटबढ़ के साथ चार प्रतिशत तक सीमित रखने का दायित्व सौंपा हुआ है. इस बीच, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति मई में घटकर 4.25 फीसदी पर आ गयी. एमपीसी बैठक में रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर बनाए रखने के पक्ष में मतदान करते समय डिप्टी गवर्नर माइकल देबब्रत पात्रा ने कहा कि इसे तेज उछाल वाली पिच पर बीच का स्टंप गॉर्ड लेने की एहतियाती कोशिश के रूप में देखा जाना चाहिए.

महंगाई का अनुमान
आरबीआई ने भारत में 2023-24 के लिए खुदरा महंगाई दर के अनुमान को 5.2 से घटाकर 5.1 फीसदी कर दिया है. खुदरा महंगाई के अलावा थोक महंगाई में तेज गिरावट आई है. अप्रैल में थोक महंगाई दर जहां 3.48 फीसदी वहीं मई में नेगेटिव में चली गई और -0.92 फीसदी पर पहुंच गई. पिछले साल अक्टूबर में थोक महंगाई दर 8.39 फीसदी थी और तब से इसमें गिरावट जारी है.

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Author: Jagran Times

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