
प्रदीप साहू/चरखी दादरी: चरखी दादरी शहर भूखे व बेसहारा लोगों की मदद के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है. यहां प्रदेश का एक मात्र ऐसा रेलवे स्टेशन है, जहां लगभग 63 वर्षों से भूखे पेट यात्रियों को नि:शुल्क भरपेट खाना खिलाया जाता है. इस रेलवे स्टेशन पर यात्री या यहां आसपास रात गुजारने वाले लोग कभी भूख पेट नहीं सोते. रामा सेवा दल समिति का ‘सांझा चूल्हा’ लगातार जल रहा है. साढ़े छह दशक से ज्यादा का वक्त बीतने पर भी यह चूल्हा एक दिन भी बंद नहीं हुआ.
1960 में लाला फकीरचंद ने रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन नि:शुल्क खाना वितरण की जो मुहिम शुरू की थी, वह आज भी जारी है. शुरुआत में दो किलो आटे की रोटियां तैयार कर वितरित की जाती थी. अब यह मात्रा 70 किलोग्राम तक पहुंच चुकी है. यह मुहिम लाला फकीरचंद ने अकेले शुरू की थी और 38 साल तक इसे जारी रखा. 1998 में लाला फकीरचंद का देहांत होने के बाद शहर के कई लोग इसे निरंतर जारी रखे हुए हैं. लाल फकीरचंद का सपना था कि शहर में कोई भूखा न सोए, जिसे अब तक जन सहयोग से साकार किया जा रहा है.
सेवा से मिलता है दिल को सुकून
संस्था ने यात्रियों का भोजन बनाने के लिए पांच कर्मचारी लगाए हैं. इन कर्मचारियों के साथ सेवा दल के सदस्य सुबह चार बजे से खाना तैयार करने में जुट जाते हैं. सुबह साढ़े दस बजे से डेढ़ बजे तक ट्रेन में बैठे, आने-जाने वाले यात्रियों को निशुल्क रोटी व सब्जी वितरित की जाती है. सुबह-शाम 70 किलो आटे की रोटियां बनाकर खिलाते हैं.
.
FIRST PUBLISHED : June 22, 2023, 22:48 IST






