Explainer : गर्मी कब जानलेवा बन जाती है और लेने लगती है जान, बचाव में तुरंत क्या करें

हाइलाइट्स

शरीर ज्यादा गर्मी की स्थिति में पसीना निकालकर शरीर के अंदर के तापमान को कंट्रोल करता है लेकिन कई बार वो ऐसा नहीं कर पाता
आमतौर पर हीट स्ट्रोक लगने पर शरीर का तापमान नियंत्रण करने का सिस्टम जवाब दे जाता है और तब अंगों पर इसका गंभीर असर होता है

यूपी के बलिया और देवरिया में 15 जून के बाद से गर्मी के कारण 122 लोगों की मौत हो चुकी है. पहले बलिया में तीन दिनों में 70 के आसपास मौतें हुईं तो फिर देवरिया में 24 घंटे में करीब 54 लोगों के मरने की खबर आई. दोनों ही जगहों पर तापमान 40 डिग्री से ऊपर चला गया था. हालांकि देवरिया के मेडिकल कॉलेज का कहना है कि ये मौतें गर्मी से नहीं बल्कि अन्य बीमारियों से हुईं हैं. बड़े पैमाने पर गर्मी के बाद लोग अस्पताल में भी भर्ती किए गए. बिहार के जमुई और अन्य स्थानों पर गर्मी प्रकोप बनकर लोगों की जान ले रही है.

सवाल ये उठता है कि हीट स्ट्रोक यानि लू और गर्मी कब और कैसे लोगों की जान लेने लगती है, ये जानलेवा बन जाती है. इस बारे में हम सबकुछ जानेंगे सवाल जवाब के रूप में

सवाल – गर्मी शरीर को कैसे प्रभावित करती है?
– बेहद गर्म दिन में बाहर निकलने के बाद हम सभी थका हुए महसूस करते हैं. इसे गर्मी का असर या हीट थकावट कहते हैं, ये तब होता है जबकि कोर तापमान को कम रखने के लिए शरीर अत्यधिक पसीना बहाता है.
“यही कारण है कि लोगों को गर्म दिनों में अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रहने की सलाह दी जाती है. हालांकि, गर्मी की थकावट वाले लोगों के मरने की आशंका नहीं रहती. ठंडी जगहों पर वापस जाने और तरल पदार्थ लेने के बाद वो ठीक हो जाएंगे लेकिन जिन्हें हीट स्ट्रोक लगती है, उनकी हालत वास्तव में चिंताजनक होती है.

सवाल – हीट स्ट्रोक यानि लू का आघात शरीर पर कब होता है?
– हीट स्ट्रोक तब होता है जब बाहर का तापमान इतना अधिक होता है कि शरीर कोर तापमान को नियंत्रित करने के लिए पसीना नहीं बहा पाता हो, तब शरीर का तापमन 40 डिग्री सेल्सियस (या 104 डिग्री फारेनहाइट) तक बढ़ जाता है. ऐसे में शरीर में सोडियम और पोटैशियम जैसे लवणों का गंभीर असंतुलन हो जाता है. नमक के असंतुलन के साथ मिलकर उच्च कोर तापमान अंगों को बाधित करता है, जिससे चिंताजनक वो लक्षण दिखने लगते हैं, जो शरीर के लिए घातक होते हैं.

सवाल – क्या लू यानि हीट स्ट्रोक से ब्रेन पर असर डालता है और शरीर के लिए खतरनाक हो जाता है?
– डॉक्टरों के अनुसार हीट स्ट्रोक का गंभीर आघात मस्तिष्क पर भी असर डाल सकता है, जिससे आंखों पर असर होता है, उनींदापन आने लगता है. गंभीर मामलों में व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है. इससे किडनी और लिवर को भी नुकसान हो सकता है. इस तरह के लक्षण इतने जानलेवा होते हैं कि व्यक्ति को मौत के मुंह में भी ढकेल सकते हैं.

सवाल – ऐसे मामलों में अस्पताल लाने से पहले क्या किया जा सकता है कि लू लगे व्यक्ति को बचाकर रखें?
– गंभीर मामलों में तुरंत व्यक्ति के ऊपर ठंडा पानी डालना चाहिए. उसे ठंडा पेय पिलाना चाहिए. नमक के स्तर को संतुलित करने के लिए इलेक्ट्रोलाइट्स देना चाहिए.

सवाल – ऐसे मामलों में प्रभावित व्यक्ति को कब अस्पताल कब जाना चाहिए?
– डॉक्टर कहते हैं कि अगर किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए: जब शरीर का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाए. पसीना बिल्कुल नहीं आए. नींद जैसा महसूस हो. उल्टियां होने लगें. पेशाब नहीं आए और ना ही वो ठीक से सांस ले पाए.

सवाल – हीटस्ट्रोक और लू के मामले किन लोगों के लिए ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं?
– जो वृद्ध और बच्चे हों, क्योंकि ये लोग गर्मी के प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि युवा लोगों को हीट स्ट्रोक नहीं हो सकता है, यह किसी भी उम्र में हो सकता है.

सवाल – हीट स्ट्रोक से बचने के लिए क्या करना चाहिए?
– बेहतर हो कि सीधे धूप में नहीं निकलें, खासकर दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच. बाहर निकलना है तो सुनिश्चित करें कि प्यास नहीं लगने पर पानी पीते रहें. लस्सी, नींबू पानी, छाछ या ओआरएस जैसे अन्य हाइड्रेटिंग तरल पदार्थों का सेवन करें जो इलेक्ट्रोलाइट स्तर को बनाए रख सकते हैं. शराब, चाय, कॉफी और कार्बोनेटेड शीतल पेय का सेवन न करें क्योंकि ये आपको और निर्जलित कर सकते हैं. हल्के, हल्के रंग के, ढीले और झरझरा सूती कपड़े पहने और चश्मे, छाते और जूतों का इस्तेमाल करें.

सवाल – गर्मी वाले दिनों में रात का तापमान भी क्या मायने रखता है?
– जब उमस ज्यादा होती है यानि वातावरण में गर्म आर्द्रता का स्तर ज्यादा होता है तो और ज्यादा खतरनाक हो सकता है, क्योंकि ऐसे में शरीर के तापमान को कंट्रोल करने वाला पसीना भी ढंग से ना तो निकल पाता है और ना ही सूख पाता है. जो शरीर के तापमान को कंट्रोल करने में दिक्कत पैदा करता है.
अगर रात का तापमान भी अधिक रहता है, तो शरीर को आराम करने का समय नहीं मिलता. शरीर को यह राहत तब मिलती है जब रात का तापमान कम होता है. यदि तापमान कुछ दिनों के लिए रात में भी कम नहीं होता तो शरीर ठीक नहीं हो सकता.

सवाल – शरीर और गर्मी की केमिस्ट्री क्या है?
– मानव शरीर का सामान्य तापमान 98.4 डिग्री फारेनहाइट या 37.5 से 38.3 डिग्री सेल्सियस होता है. इसका मतलब ये नहीं है कि 38 या 40 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर आपको गर्मी नहीं लगनी चाहिए. वास्तव में ये शरीर का कोर तापमान होता है. यानी त्वचा के स्तर पर इससे कम तापमान भी महसूस हो सकता है.

सवाल – हवा में ज्यादा गरमी क्यों महसूस होने लगती है?
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हवा ऊष्मा की सुचालक नहीं है. आसान भाषा में ऐसे समझिए कि तापमान की तुलना आप अपने शरीर के संपर्क में आने वाले वातावरण के साथ करते हैं. आपका शरीर जब हवा के संपर्क में आता है तो हवा का तापमान आपके शरीर में ट्रांसफर होता है, लेकिन आपके शरीर का तापमान हवा में उतना ट्रांसफर नहीं होता क्योंकि हवा ऊष्मा की अच्छी चालक नहीं है. लेकिन पानी है. जब आप पानी के संपर्क में आते हैं तो आपके शरीर का तापमान पानी में ट्रांसफर होता है. यही वजह है कि 45 या 50 डिग्री सेल्सियस के ताप वाला पानी आपको उतना गर्म नहीं महसूस होता, जितनी इसी ताप वाली हवा.

सवाल – वॉटर लॉस क्यों बर्दाश्त नहीं कर सकता शरीर?
– पानी हमारे शरीर का जीवन स्रोत है इसलिए हमारे शरीर में सबसे ज़्यादा पानी ही है. गर्मी में पसीना बहने से न केवल पानी बल्कि सॉल्ट यानी नमक की भी कमी होती है. पानी हर अंग के लिए ज़रूरी है. 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के चलते अगर शरीर में पानी की कमी होती है और देर तक बनी रहती है तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं जैसे हीट स्ट्रोक, हार्ट स्ट्रोक या ब्रेन हैमरेज तक.

सवाल – हीट वेव और हीट स्ट्रोक क्या है?
हीट वेव को भारतीय संदर्भ में समझा जाए तो इसका मतलब लू है. जैसे सर्दियों के मौसम में शीतलहर होती है, वैसे ही गर्मियों में लू. यानी बेहद गर्म हवा. हीट वेव किस तापमान की होती है? इसका जवाब ये है कि स्थान के हिसाब से एक सामान्य तापमान तय होता है. अगर उस सामान्य तापमान से करीब 5 डिग्री सेल्सियस ज़्यादा तापमान होता है, तब हीट वेव होती है.
पहले बताए जा चुके कारणों से जब हीट वेव या बेहद गर्मी के चलते शरीर बर्दाश्त नहीं कर पाता और शरीर का तापमान बढ़ने से पैदा होने वाली गंभीर समस्याओं को हीट स्ट्रोक कहा जाता है. बेहोशी, चक्कर और तेज़ सिरदर्द इसके साफ लक्षण हैं.

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Author: Jagran Times

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