PHOTOS: क्या आएगी तबाही? 10 साल में 65% तेजी से पिघले हिमालय के ग्लेशियर, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी



मुख्य लेखक फिलिपस वेस्टर ने AFP को बताया कि ‘जैसे-जैसे यह गर्म होगा, बर्फ पिघलेगी, जिसकी उम्मीद पहले से थी. लेकिन जो अप्रत्याशित और बहुत चिंताजनक है वह है पिघलने की गति. यह जितना हमने सोचा था उससे कहीं अधिक तेजी से हो रहा है.’ रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंदू कुश हिमालय (HKH) क्षेत्र में ग्लेशियर पर्वतीय क्षेत्रों में लगभग 24 करोड़ लोगों के साथ-साथ नीचे नदी घाटियों में अन्य 165 करोड़ लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण जल स्रोत हैं. (फोटो AP)

वर्तमान स्थिति के आधार पर ICIMOD ने कहा कि सदी के अंत तक ग्लेशियर अपनी वर्तमान मात्रा का 80 प्रतिशत तक खो सकते हैं. बता दें कि ICIMOD, एक अंतर-सरकारी संगठन है. इसमें सदस्य देश के रूप में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, चीन, भारत, म्यांमार और पाकिस्तान भी शामिल हैं. (फोटो AP) ग्लेशियर दुनिया की 10 सबसे महत्वपूर्ण नदी जिनमें गंगा, सिंधु, येलो, मेकांग और इरावदी शामिल हैं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अरबों लोगों को भोजन, ऊर्जा, स्वच्छ हवा और आय की आपूर्ति करता है. ICIMOD के उप प्रमुख इजाबेला कोजिएल ने कहा कि ‘यहां ग्लेशियर और जमे बर्फ पर एशिया में दो अरब लोगों के पानी पर निर्भरता बनी हुई है. इस क्रायोस्फीयर (एक जमे हुए क्षेत्र) को खोने के परिणाम बहुत विशाल है.’ (फोटो AP) समीक्षा की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही ग्लोबल वार्मिंग पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.5 से 2.0 डिग्री सेल्सियस तक सीमित है, जो पेरिस जलवायु संधि में सहमत है, ग्लेशियरों को 2100 तक अपनी मात्रा का एक तिहाई से आधा खोने की उम्मीद है. (फोटो Unsplash) मुख्य लेखक फिलिपस वेस्टर ने आगे कहा है कि यह तत्काल जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करता है. हर छोटी वृद्धि का बहुत बड़ा प्रभाव होगा और हमें वास्तव में, वास्तव में जलवायु पर काम करने की आवश्यकता है. (फोटो Unsplash) मालूम हो कि 1800 के दशक के मध्य के बाद से दुनिया लगभग 1.2 डिग्री सेल्सियस का औसत गर्म हुआ है. इससे चरम मौसम का एक सिलसिला शुरू हो गया है. इससे तीव्र गर्मी की लहरें, अधिक गंभीर सूखे और चक्रवाती तूफान अधिक क्रूर हो गए हैं. (फोटो Unsplash)

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Author: Jagran Times

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