जज्‍बे को सलाम: 35 साल से पेड़ों के रक्षक बने गणित के प्रोफेसर, हजारों पेड़ लगाने के साथ कर रहे ये काम

आशीष शर्मा/यमुनानगर: पर्यावरण को संतुलित रखने के लिए पेड़ों का होना बेहद जरूरी है और पेड़ों के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले एक मेथेमेटिक्स के प्रोफेसर पिछले 35 सालों से पेड़ों के बॉडीगार्ड बने हुए हैं. अब तक हरियाणा में ये प्रोफेसर हजारों पेड़ लगा चुकें है और लोगों को इस बारे में समय-समय पर जागरूक भी कर रहें है.

ग्रीन मैन के नाम से इलाके में मशहूर प्रोफेसर डॉक्टर एसएल सैनी पिछले करीब 35 सालों से कुछ ऐसा कर रहें है, जो उन्हें सब से खास बना देता है. डॉक्टर एसएल सैनी अपने फॉरन टीचिंग असाइनमेंट के दौरान विदेश क्या गए उनके जीवन का मकसद ही बदल गया. वो हर रोज सुबह बुलेट मोटरसाइकिल पर अपने घर से निकलते हैं और ध्यान रखते हैं कि कहीं कोई पेड़ कटा या टूटा तो नहीं हुआ. अगर उन्हें कोई पेड़ टूट कर गिरा हुआ मिल जाए, तो वो उसकी जगह तुरंत नया पेड़ लगा देते हैं. इस रूटीन को प्रोफेसर सैनी की टीम में शामिल करीब 15 हजार वॉलिंटियर्स भी अपने जीवन में ढाल चुके हैं.

जब पर्यावरण बचाने की मुहिम की शुरू
डॉक्टर प्रोफेसर एसएल सैनी ने साल 1989 में पर्यावरण को बचाने के लिए पेड़ लगाने की मुहिम शुरू की थी. उन्होंने मेथेमेटिक में पीएचडी करने के बाद बतौर प्रोफेसर काम किया. हालाकि उन्हें रिटायर हुए भी अब 15 साल हो चुके हैं. जब वो अपनी जॉब के दौरान फॉरन टीचिंग असाइनमेंट के लिए विदेश गए थे, तो वहां उन्हें एक जापानी प्रोफेसर मिले जिनके साथ चर्चा के दौरान उन्हें इस सोशल काम की प्रेरणा मिली. यमुनानगर लोटने के बाद उन्होंने देखा कि इंडस्ट्रियल टाउन होने के कारण यहां हर तरफ बंजर भूमि, धूल मिट्टी और प्रदूषण की भरमार है. तब उन्हें लगा कि पर्यावरण को बचाने के लिए उन्हें यहीं से पहल करनी पड़ेगी. शुरुआत में एक साल तक उन्होंने अपनी जेब से अकेले इस काम को किया. मगर वो बहुत बड़ा काम है कोई एक व्यक्ति अपनी जेब से इस काम को नहीं कर सकता. शहरों, बस्तियों, गलियों और बाजारों में उन्होंने बहुत कड़ी मेहनत की, जिसका नतीजा है कि यमुनानगर में 95 प्रतिशत से ज्यादा हरियाली हो चुकी है.

हरियाणा एनवायरमेंट सोसाइटी का किया गठन
डॉक्टर सैनी ने हरियाणा एनवायरमेंट सोसाइटी (एचईएस) नामक एनजीओ का गठन किया है. जिसकी टीम पेड़ को लगाने के बाद लगातार 5 साल तक उसकी परवरिश करती है और आंधी तूफान या आवारा पशुओं से बचाने के लिए लोहे के एक ट्री गार्ड में सुरक्षित रखते हैं. आज संस्था के पास पानी के टैंकर , मालियों की टीम , ट्री गार्ड बनाने की अपनी वर्कशॉप है और 15 हजार के आसपास वॉलिंटियर्स हैं. हरियाणा के कई जिलों में हजारों पेड़ लगाए जा चुके हैं.

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Author: Jagran Times

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