Anna Karenina Is A Timeless Tale : लेव तोल्स्तोय के इस महान उपन्यास ने उन्हें पूरी दुनिया में किया मशहूर



लेव तोल्स्तोय का जन्म 9 सितंबर 1828 में हुआ था. उनके पिता ने नोपोलियन के हमले के विरुद्ध देशभक्तिपूर्ण युद्ध में हिस्सा लिया था. तोल्स्तोय जब दो साल के थे उनकी मां का देहांत हो गया और 1837 में उनके पिता का भी. उनकी परवरिश कज़ान में उनकी चाची द्वारा हुई. तोल्स्तोय के ऊपर अपनी एक चचेरी बहन का गहरा प्रभाव पड़ा, जिसे उन्होंने अपनी युवावस्था में बेहद मर्मस्पर्शी ख़त लिखे. अपने बचपन के दिनों को उन्होंने आगे चलकर सुखद रूप में याद किया. उनकी शुरुआती पढ़ाई घर पर ही हुई, साथ ही उन्होंने कानून का अध्ययन भी किया. शुरुआती साहित्यिक परियोजनाएं उनकी साल 1851 की डायरी में मिलती है, जिसमें उनकी कई रचनाओं की कच्ची रूपरेखाएं मौजूद हैं. तोल्स्तोय नियमित डायरी लिखते थे, जिसने उनके कृतित्व में बड़ा योगदान दिया. ऐसा माना जाता है, कि उनके उपन्यासों में जो आत्मकथात्मक तत्व शामिल किए गए हैं, उसकी जड़ में उनके डायरी लेखन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. शायद यही वजह है कि तोल्स्तोय जब एक कमरे में खड़े नायक या नायिका के बारे में लिखते हैं, तो कमरे में रखी हर चीज़ का गहराई से चित्रण करते हैं और उन्हें पढ़ते हुए दिमाग में कई चित्र बनते जाते हैं, ऐसा लगता है सबकुछ जैसे आसपास घटित हो रहा हो.

औपनिवेशिक पराधीनता के समय में ही हिंदी पाठक ‘डिकेन्स’, ‘तोल्स्तोय’, ‘चेखव’, ‘गोर्की’ और ‘हावर्ड फास्ट’ से परिचित हो चुके थे, लेकिन बाद के समय में ये सिलसिला कमज़ोर पड़ने लगा था. कुछ अच्छी कृतियों के अनुवाद आए, लेकिन उनकी संख्या बेहद कम थी. वैश्विक परिवर्तनों के चलते विश्व साहित्य को पढ़ने वाले हिंदी पाठकों की संख्या भी बहुत कम हो गई थी. ऐसा नहीं था कि पाठक अच्छा विश्व साहित्य पढ़ना नहीं चाहता था, लेकिन बाज़ार में उपलब्धता ही नहीं थी. साल 2003 में ‘आन्ना कारेनिना’ का हिंदी संस्करण राजकमल विश्व क्लसिक द्वारा प्रकाशित किया गया, जो उनकी विश्व क्लासिक श्रृंखला का हिस्सा है. ये वो श्रृंखला है जिसमें विश्व की उन सुप्रसिद्ध कृतियों के हिंदी अनुवाद प्रकाशित हुए जो सालों पहले भी प्रकाशित हो चुके थे, लेकिन उन कृतियां को या तो भुलाया जा चुका था, या फिर नए पाठकों के लिए उनका मिलना दुर्लभ था.

ऐसा नहीं था, कि तोल्स्तोय का ‘आन्ना कारेनिना’ इससे पहले हिंदी में प्रकाशित नहीं हुआ था, लेकिन भाषा के स्तर पर पाठक वर्ग में बड़ा परिवर्तन आ चुका था, जिसके चलते आम व्यक्ति से और अधिक जोड़ते हुए इसे फिर से अनुवादित किया गया. ‘राजकमल विश्व क्लासिक’ ने ‘आन्ना कारेनिना’ के दो भाग प्रकाशित किए, जिसका अनुवाद ‘डॉ. मदनलाल मधु’ ने किया.

Bal Kahani: आखिर क्यों अपने-आप ही नाच रहा था पिंटू, पढ़ें प्रकाश मनु की कहानी ‘धमाल पंपाल के जूते’

लेव तोल्स्तोय का उपन्यास ‘आन्ना कारेनिना’ एक ऐसा उपन्यास है, जिसमें आन्ना नाम की स्त्री का चरित्र सबसे ज्यादा उभर कर सामने आता है, जो कि कहानी का मुख्य पात्र भी है. हालांकि कहानी दो और कहानियों को लेकर गढ़ी गई है, जिसमें सारे चरित्र आपस में टकराते हैं और सबकी अपनी कहानी है. कहानी की शुरुआत एक ऐसे परिवार से होती है, जिसमें एक धैर्यवान स्त्री शादीशुदा जीवन में संबंधों का निर्वाह करते हुए रिश्तों को निभा रही होती है, वहीं आन्ना भी एक ईमानदार पत्नी है लेकिन अपनी कल्पना एक रुमानी नायिका की तरह करती है, जिसकी सबसे बड़ी वजह होती है- वैवाहिक जीवन में रिक्तता. उसका पति एक सरकारी मंत्री है और आम व्यवहार में अच्छा इंसान है. आन्ना एक मां भी है, लेकिन आन्ना को एक फौजी अफ़सर से प्रेम हो जाता है.

आन्ना अपने खालीपन को ढूंढते हुए प्रेमी के लिए घर छोड़ देती है. उपन्यास जैसे-जैसे आगे बढ़ता है आन्ना पिछले जीवन के लिए अपने फैसले को धिक्कारती है. गहरी मनोदशा उसे पगल जैसी मन:स्थिति में पहुंचा देती है और वह असल दुनिया से पूरी तरह कट जाती है और अंत में आत्महत्या कर लेती है. इस बात का एहसास उसे बहुत बाद में होता है, कि वह जीवन के बारे में अलग तरह से सोच रही थी, लेकिन जीवन उसकी समझ और सोच से बहुत अलग था. जब तक वो समझ पाती है, तब तक बहुत देर हो जाती है. उपन्यास के द्वारा तोल्स्तोय ये बताना चाहते हैं, कि संबंधों के जिस रुमानी खयाल को प्रेम समझा जाता है, उसका उन्नत किस्म के प्यार से या फिर खुशहाल परिवारों के अंतरंग प्रेम से कोई वास्ता नहीं होता.

आन्ना कारेनिना के माध्यम से तोल्सतोय ने ये दिखाने की कोशिश की है, कि आकस्मिक सामाजिक परिवर्तन पूरी तरह अनुपयोगी है. यह उपन्यास तोल्स्तोय के आत्मसंघर्ष की भी कहानी कहता है, जिसे लिखने में उन्हें पांच वर्ष का समय लगा और उपन्यास 1876-77 के बीच प्रकाशित हुआ. इसकी कहानी अपराध या पाप के नैतिक प्रश्न को सामाजिक संदर्भों में प्रस्तुत करते हुए औरत के मानसिक द्वंद्व का चिंतन करती है. साथ ही उस समय के रूसी जीवन के सभी बुनियादी और केंद्रीय विरोधों को भी चित्रित करती है. गौरतलब है, इसके प्रकाशन के बाद तोल्स्तोय गंभीर वैचारिक संकट के दौर से गुज़रे और सामाजिक ढांचे की निर्मम-बेलाग आलोचना करने की स्थिति तक जा पहुंचे.

The Second Sex : ‘सीमोन द बोउवार’ की वो किताब, जो हर औरत के मन की बात कहती है

आन्ना कारेनिना में तोल्स्तोय ने स्त्री-प्रश्नों का गहरा दार्शनिक चिंतन किया है, उसके साथ ही उसकी तकलीफों और उसके मन के द्वंद्व को गहराई से समझ कर प्रस्तुत किया है. उपन्यास को पढ़ते हुए ये बात गहराती जाती है, कि व्यक्तिगत जीवन में ऐसे कई परिवर्तन होते हैं जिनका असर सामाजिक तौर पर भी देखने को मिलता है. भीतर की लड़ाई, तिरस्कार, कल्पनाएं, उम्मीद और सपनों के बाद आशाविहीन होने की स्थिति किस स्तर तक खतरनाक हो सकती है, ये आन्ना के चरित्र में पूरी तरह परिलक्षित होता है. जिस काल्पनिक दुनिया की तलाश में आन्ना का मन घर से बाहर जाता है, वो असल में संतोष और संतुष्टि होता ही नहीं है, बल्कि उसके जीवन को और मुश्किल बनाने का एक अंतहीन संघर्ष बन जाता है. द्वंद्व और संघर्षों के बीच झूलती एक स्त्री आत्महत्या तक पहुंच जाती है. उपन्यास में आन्ना का मरना थोड़ा अजीब है, लेकिन ऐसा कई बार होता है, कि पीछे लौटने के सारे दरवाज़ें खुले होते हैं, लेकिन रास्ते खत्म हो जाते हैं. मन हर तरह के एहसास से ऊपर उठ जाता है और अपने आसपास की हर चीज़ हर रिश्ते से यकीन खो बैठता है. वो जहां से आती है वहां सबकुछ सामान्य होता है और उसके वापिस लौटने की कोई ज़रूरत कहीं बाकी नहीं रह जाती. और, जहां होती है, वो जगह शायद उसके लिए होती ही नहीं है. पति-बच्चे-प्रेम-समाज उससे बहुत दूर खड़े नज़र आते हैं. हर जगह होते हुए भी वो स्वयं को हर जगह से अलग पाती है. सामाजिक दबाव हर बात का इतना ज्यादा होता है, कि सबकुछ उसके मन के विपरीत चलता है. स्थिति अवसाद तक पहुंच जाती है और उसके बाद आत्महत्या.

उपन्यास इसलिए भी पढ़ना ज़रूरी हो जाता है, क्योंकि एक तो यह वैश्विक तौर पर लोकप्रिय साहित्य है, साथ ही इसके माध्यम से तोल्स्तोय ने मानवीय संबंधों, सामाजिक नैतिकताओं और प्रेम व इच्छा के परिणामों की जटिल गहराई में उतरने की कोशिश की है. उपन्यास में औरत की एक खास स्थिति में पहुंचने को बेहद करीब से समझने की कोशिश की गई है. कहानी आन्ना के चरित्र की खोज करने में कामयाब रही है. ये वो महान कृति है जो अपने प्रकाशन के बाद से अब तक दुनिया भर के पाठकों को मोहित करती आ रही है. इसकी सार्थकता इसी बात से जाहिर होती है कि उपन्यास सदियों बाद भी पाठक से अपना संबंद्ध स्थापित किए हुए है. इसे पढ़ते हुए एक स्त्री-मन की विश्लेषणात्मक पड़ताल में जाने का मौका मिलता है.

Popular Hindi Novels : प्रसिद्ध लेखकों द्वारा लिखित सर्वश्रेष्ठ हिंदी उपन्यास, जिन्हें आपको अवश्य पढ़ना चाहिए

कहानी पति-प्रेमी और आन्ना को केंद्र में रखकर रची गई है, जो एक उच्च समाज की विवाहित महिला है और शादी-बच्चे के बाद प्रेम की दुनिया में प्रवेश करती है, लेकिन प्रेम की गहराई में जाते ही उसके जीवन में उथल-पुथल शुरु हो जाती है और उसका होना सामाजिक नियमों को चुनौती देने लगता है. तोल्स्तोय ने बेहद कुशलता से कई पात्रों की कहानियों को एक साथ बुना है, जहां आन्ना का दुःखद प्रेम उन अन्य लोगों की ज़िंदगी से जुड़ता है. उपन्यास कल्पना, विवाह, प्रेम और नैतिकता की जटिलताओं का पता लगाता है. तोल्स्तोय ने उपन्यास में विभिन्न प्रकार के संबंधों का चित्रण किया है. यह उपन्यास 19वीं सदी के रूस के कठोर सामाजिक नियमों की आलोचनात्मक जांच करता है और उच्च वर्ग के उस दोहरे चरित्र को उजागर करता है, जहां दिखावा और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा सर्वोपरी होती है. आन्ना का विवादास्पद संबंध स्थापित संस्कृति को चुनौती दे बैठता है और समाज में मौजूदा द्वंद्व की प्रमुखता पर प्रकाश डालता है.

‘आन्ना कारेनिना’ में तोल्स्तोय, विवाह और पारिवारिक जीवन का संवेदनशील चित्रण प्रस्तुत करते हैं. आन्ना का संबंध दांव पर लगे विवाहित बंधन की क्षीणता को उजागर करता है. उपन्यास नैतिकता और समाज में मौजूद धर्म-पाखंड पर कई ज़रूर सवाल खड़े करता है. उपन्यास की मुख्य पात्र आन्ना अपनी इच्छाओं और समाज की उम्मीदों के बीच उलझी हुई एक मुश्किल स्त्री है, जो समाज को विचित्र लग सकती है. एक खूबसूरत और आकर्षक अधिकारी का प्रेमी बनकर उसके जीवन में आना और संबंधों के बाद कई तरह के सच का उजागर होना प्रेम की मोहकता को भंग करता है. उपन्यास की कहानी मानवीय संबंधों, संघर्ष, परिवार और समाज की जटिलताओं के साथ खेलती है, जिसके माध्यम से पाठक स्वयं को एक संवेदनशील यात्रा पर पाता है.

असद ज़ैदी की वो चुनिंदा कविताएं जिन्होंने हिंदी साहित्य की बौद्धिक दुनिया में हलचल-भरी बहस शुरू कर दी थी

Source link

Jagran Times
Author: Jagran Times

Leave a Comment

Read More