
पीयूष पाठक/ अलवर. अलवर जिले मे पिछले कुछ समय से गर्मी ने अपने तेवर तेज किए हैं. इस बार देर से गर्मी का असर दिखाई दिया है. आमतौर पर नौतपा में गर्मी का असर सबसे तीव्र होता है. लेकिन इस बार मौसम ने पलटी खाई और नौतपा में भी गर्मी का असर कुछ खास नहीं दिखाई दिया. वैसे तो गर्मी में लोग पदार्थों की डिमांड करते हैं. अलवर शहर में गर्मी में सबसे ज्यादा डिमांड वाला पेय पदार्थ गन्ने का जूस है. लेकिन इस बार देर से पड़ी गर्मी ने गन्ने के जूस के कारोबार पर भी असर डाला. पिछले सीजन की तुलना में इस बार काम आधा ही निकलता हुआ दिखाई दे रहा है. हालांकि, शाम 4 बजे बाद लोग घरों से निकलते हैं और बाजार का रुख करते हैं. 4 बजे से लेकर 8 बजे तक दुकान पर ग्राहकी रहती है.
पिछले साल से कम आ रहे ग्राहक
शहर के बाजार मे 35 सालों से काम कर रहे अमर सिंह ने बताया कि हमारी य़ह दुकान शहर की सबसे पुरानी गन्ने की जूस की दुकान है. इस दुकान पर जूस पीने के लिए दूर दूर से लोग आते हैं. लेकिन इस बार देर से गर्मी आने का असर जूस के काम पर भी पड़ा है. पिछले सीजन तक इस समय बहुत अच्छा काम निकल रहा था. लेकिन इस बार काम उस तरह से नहीं निकल पा रहा जिस तरह हर साल गर्मियों के सीजन में निकलता था. इसका कारण यह है की जिले में गर्मी की शुरुआत देरी से हुई. पिछले सीजन तक गर्मियों में सुबह से ही ग्राहकों की लाइन लगी रहती थी. लेकिन इस बार पिछले साल जैसा काम नहीं है.
70 साल पुरानी है दुकान, पूरे साल मिलता है जूस
अमर सिंह ने बताया कि य़ह दुकान करीब 70 साल पुरानी है. जिसे दो भाइयों निरंजन लाल उजागर मुकुंद लाल आहूजा ने शुरू की. शुरुआती दौर में यहां दो आने का एक गिलास जूस मिलता था. अब यहां पर गन्ने के जूस की कीमत 15 रुपये से लेकर 30 रुपये के बीच है. इस दुकान पर महाराष्ट्र से गन्ना मंगवाया जाता है. जिसका ताजा जूस निकाल कर लोगों को पिलाया जाता है. हमारी दुकान पर लोग गिलास से ज्यादा मिट्टी के कुल्लड़ मे गन्ने का जूस पीना पसंद करते हैं. अमर सिंह ने बताया कि हमारी दुकान पर पूरे साल पर गन्ने का जूस लोगों के लिए उपलब्ध रहता है. संभवत: यह पहली ऐसी दुकान होगी जो 365 दिन लोगों को गन्ने का जूस पिलाती है.






